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स्वरचित पंक्तियाँ डॉ कल्पना सिंह के द्वारा स्त्री शक्ति महिला सशक्तिकरण पर विशेष उत्साह वर्धक पंक्तियाँ

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                                 स्वरचित पंक्तियाँ डॉ कल्पना सिंह के द्वारा स्त्री शक्ति महिला सशक्तिकरण पर विशेष उत्साह वर्धक पंक्तियाँ अब द्यूत कोई आंगन में मेरे फिर न खेला जाएगा चीर हरण का काला वह इतिहास नहीं दोहराएगा दु:शासन के हाथ मेरे केशों को न छूने पाएंगे मर्यादा के रक्षक मेरे, मौन नहीं रह पाएंगे मेरे सम्मान के रक्षण को, उन्हें धर्म सिखाया जाएगा मैं स्त्री हूँ इसका न अब मोल चुकाया जाएगा इस गलती में मत रहना गोविन्द नहीं अब आएगे मेरे अंतस से प्रतिपल गोविन्द मुखर हो जाएगे मेरे कण कण से मां शक्ति शस्त्र उठा कर दौड़ेगी अब कोई भी अग्नि सुता न मान घात फिर सह लेगी अब कोई भी शकुनि कही मेरे घर में फिर पल पाएगा अब कोई भी अंधा बहरा शासक न फिर बन पाएगा अब स्त्री की प्रचंड शक्ति का, विश्व ताण्डव देखेगा न सुधरे तो सृजन भूल विध्वंस की ज्वाला देखेगा अब द्यूत कोई आंगन में मेरे फिर न खेला जाएगा चीर हरण का काला वह इतिहास नहीं दोहराएगा रचना कार डाॅ कल्पना सिंह कविता सुनने के लिए क्लिक करें और पूरा वीडियो देखे

स्वरचित प्रेरक पंक्तियाँ फिर सूर्य उदित होगा डॉ कल्पना सिंह के द्वारा

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                             स्वरचित प्रेरक पंक्तियाँ फिर सूर्य उदित होगा डॉ कल्पना सिंह के द्वारा प्रेरणा, प्रयास और कर्म जो जीवन की दिशा और दशा बदल दे. ऐसी ही प्रेरणादायी नवसृजित पंक्तियाँ समर्पित करती हूँ. यह रात भले ही काली है दिल को दहलाने वाली है घनघोर अँधेरा छाया है पर सूरज न ठंढाया है कर्म श्रेष्ठ करना होगा तुझे भाग्य नया लिखना होगा फिर चीर अंधेरा राहों का तुझे जीवन सा सजना होगा सोना अग्नि में तपता है कुन्दन बन तभी दमकता है तलवार जो रेती जाती है उपयुक्त वही बन पाती है जो बोया था वह काट रहे सिद्धांत कर्म का याद रहे सरिता सा पावन बनना है इस लिए तुझे फिर बहना है सूरज फिर वही उदित होगा तेरा हर लक्ष्य विजित होगा निर्जन में सृजित चमन होगा पुष्पित आनंद सुमन होगा तुझे धैर्य मगर धरना होगा बन सूरज फिर उगना होगा तुझे बिना रुके चलना होगा तुझे लक्ष्य भेद करना होगा रचनाकार डाॅ कल्पना सिंह कविता सुनने के लिए क्लिक करें

समय के बारे में मुख्य बातें, जो न मात्र हमारी सफलता सुनिश्चित करती है अपितु हर कदम पर हमे सशक्त बनाए रख कर किसी भी प्रकार के निराशा से बचाती है

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  समय के बारे में मुख्य बातें, जो न मात्र हमारी सफलता सुनिश्चित करती है अपितु हर कदम पर हमे सशक्त बनाए रख कर किसी भी प्रकार के निराशा से बचाती है 1- अपने हर दिन के समय का उचित विभाजन करना, जिसमें हमे ध्यान रखना है कि दिन की शुरुआत हम ऐसे काम से करें जो हमें दिन भर ऊर्जा दे सके, क्योंकि इसी ऊर्जा से हम दिन भर काम करने वाले है. 2- हमे अपने गुणों की पहचान कर उसे अपनी ताकत बनाना है, उस पर काम करके और निखारना है. 3- हमे कोई भी काम आरम्भ करते समय सिर्फ यह नहीं सोचना कि काम आरम्भ करने में क्या समस्याएं है अपितु केन्द्रित करना है कि हम इस काम से लोगों की कौन सी समस्या का हल दे सकते हैं, क्योंकि पहचान हमे इस बात से मिलनी है कि हम लोगो कि समस्या का हल दे पाने में कितना समर्थ है. 4- लोगों की समस्या पहचान कर उन्हें सुनिश्चित हल देने पर केन्द्रित होना है. 5- हमारा काम परिणाम पर केन्द्रित नहीं रहना है, बल्कि काम पर केन्द्रित रहना है. हमें हर समय ध्यान देना है कि हम अपना काम कितने अच्छे से कर सकते है, काम में अपना 100% प्रयास करना है, क्योंकि काम का अच्छे से पूर्ण होना स्वयम् सुखद परिणाम सुनिश्चि...

स्नेह हमारा स्वरचित पंक्तियाँ डॉ कल्पना सिंह के साथ

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                                     स्नेह हमारा स्वरचित पंक्तियाँ डॉ कल्पना सिंह के साथ क्यों आंखे मूंद लेते हो निगाहें फेर लेते हो हमें मिलने की चाहत है क्यों बंधन तोड़ लेते हो निगाहें द्वार पर रख कर हृदय में प्यार को भर कर कि मिलने आओगे एक दिन यही सोचा किए हर पल जहाँ में देख लेना जी कहीं भी ढूंढ लेना जी नहीं पाओगे हम जैसा यही महसूस होगा जी हमारा प्रेम है ऐसा सुखद मकरंद के जैसा कि सौरभ मुझसे आया है तेरा जीवन सुमन जैसा रचना कार - डॉ कल्पना सिंह

मेरा प्यार मेरा संसार स्वरचित पंक्तियाँ डॉ कल्पना सिंह द्वारा #loveinlife

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                               मेरा प्यार मेरा संसार स्वरचित पंक्तियाँ डॉ कल्पना सिंह द्वारा माँ तेरा आंचल मै भूली नहीं पर सच कहूं कि बहुत याद करती भी नहीं पापा की दृढ़ता उनका संकल्प कैसे भुलाऊं पूरा जीवन सब कुछ साथ ही पाएंगे माँ का स्नेह पिता का संरक्षण है वो नदी की कोमलता भूमि सा धैर्य है वो मै जिसकी बात करती हूँ उससे जी भर झगड़ती हूँ जितना भाई बहनों से न झगड़ी मै उससे ज्यादा झगड़ कर, वह प्यार पूरा करती हूँ मैं कोई दोस्त हो न हो साथ मेरे कमी लगती नहीं, जब वह होता है पास मेरे बस यही तो छोटा सा संसार है मेरा कोई और नहीं, वो प्यार है मेरा तपती कड़ी धूप में वो छांव अलबेला जीवन के सफर में हम सफर वो मेरा रचनाकार डाॅ कल्पना सिंह कविता सुनने के लिए क्लिक करें

मेरी जिजीविषा स्वरचित पंक्तियाँ डॉ कल्पना सिंह द्वारा

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                                                                     मेरी जिजीविषा स्वरचित पंक्तियाँ डॉ कल्पना सिंह द्वारा मैं सृजन का बीज हूँ वह, जो धरा के बीच दब कर है निरंतर सोचता, एक दिन मुझे अवसर मिलेगा बादलों से जब उतर कर, नीर की एक बूंद अनुपम जब भिगाएगी धरा को, वृक्ष मै उस दिन बनूंगा बढ़ के यदि कोई काट देगा गगनचुम्बी शाख मेरी ऊंचे गगन के भाल को छूने से मुझको रोक देगा मै मेरी बाहों को धरती पर बढ़ा दूंगा निरंतर भर कर धरा को अंक में आनंद से मै झूम लूंगा घोलो निरर्थक विष भले तुम मै तनिक विचलित न हूँ गा प्रेम का सिंधु हूँ मैं, बस प्रेम की वर्षा करूँगा काट दो शाखाएँ चाहे, तुम जड़ों को काट डालो सिर्फ देना जानता हूँ, मै तुम्हें देता रहूँ गा मिट भी जाऊँ मैं अगर तेरे कुठाराघात से एक एक फल फूल चुनना तुम मेरी शाखाओं से खा कर मीठा फल हमारा, तुम खुशी में झूम लेना खुश रहो प्रति दिन तुम्हे आशीष मै देता रहूँ गा उन फलों के बी...

भाग्य शिल्पकार स्वरचित पंक्तियाँ डॉ कल्पना सिंह के साथ, साथ है शिक्षक शिष्य सम्बन्ध विशेष कविता

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                                भाग्य शिल्पकार स्वरचित पंक्तियाँ डॉ कल्पना सिंह के साथ कर्म की कलम से प्रारब्ध लिख रहे हैं हम भाग्य शिल्पकार है सौभाग्य रच रहे हैं धरती हो या गगन हो वायु हो या अगन हो रण वेदिका पर प्रतिदिन पुरुषार्थ से समर हो संतति प्रभु तुम्हारे तेरा नाम कर रहे हैं हम भाग्य शिल्पकार है सौभाग्य रच रहे हैं पर्वत विशाल हो या गहरी खुदी हो खाई संकल्प शक्ति लेकर अपनी लड़ो लड़ाई पग डग मे हम अटल कर इतिहास रचा रहे हैं हम भाग्य शिल्पकार है सौभाग्य रच रहे हैं कठिनाईयां हो कैसी रुकते नहीं कदम हो जीवन सलिल से ऊपर कर्तव्य की तपन हो चैतन्य बन प्रभु हम तेरा काम कर रहे हैं हम भाग्य शिल्पकार है सौभाग्य रच रहे हैं रचनाकार डाॅ कल्पना सिंह कविता सुनने के लिए क्लिक करें इसे भी अवश्य सुने