Carnot’s Reversible Heat Engine कारनाॅट व्युत्क्रमणीय ऊष्मा इंजन या कारनाॅट ऊष्मा इंजन शैक्षणिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए भौतिक विज्ञान का यह टाॅपिक डाॅ कल्पना सिंह के साथ ऊष्मा इंजन के महत्वपूर्ण तथ्य- ऊष्मा इंजन, ऊष्मीय ऊर्जा को कार्य में परिवर्तित करने की युक्ति है. वैज्ञानिक साडी कारनाॅट ने आदर्श ऊष्मा इंजन की परिकल्पना प्रस्तुत किया था. यह पूर्णतः व्युत्क्रमणीय चक्र पर आधारित है जिसे कारनाॅट चक्र कहते हैं. कारनाॅट ऊष्मा इंजन, इंजन द्वारा अवशोषित अधिकतम ऊष्मा को कार्य में परिवर्तित कर देता है. समान तापमान के बीच कार्य करने वाले सभी व्यवहारिक ऊष्मा इंजनों में, कारनाॅट ऊष्मा इंजन से कम दक्षता ही पायी जाती है. कारनाॅट ऊष्मा इंजन की दक्षता भी 100% नहीं होती है. ऊष्मा इंजन के महत्वपूर्ण घटक- 1- उच्च ताप कुण्ड या ऊष्मा स्रोत 2- निम्न ताप कुण्ड 3- कार्यकारी पदार्थ 4- ऊष्मारोधी आधार उच्च ताप कुण्ड या ऊष्मा स्रोत - स्रोत, एक निश्चित उच्च ताप T 1 पर बना रहता है, जिससे ऊष्मा इंजन निरंतर ऊष्मा ले सकता है, परन्तु...
डॉ कल्पना सिंह महिलाओं के प्रति आम होते जघन्य अपराध एवं विधिक सुरक्षा हम यहॉ सम्पूर्ण स्वास्थय की बात करते है। आज के इस लेख में हम एक ऐसे मुद्दे पर बात करेगें , जो समाज के स्वास्थय को बनाए रखने के लिए नितांत आवश्यक है और वह है महिला सुरक्षा से सम्बन्धित कानूनों की जानकारी। इन कानूनो पर चर्चा से पूर्व , मै एक महत्वपूर्ण बात करना चाहूॅगी। कानून बनाना एवं उसकी जानकारी तथा प्रयोग , समाज में महिलाओं के विरूद्ध हो रहे अपरध रोकने के लिए अति महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से उत्तर प्रदेश में मिशन शक्ति अभियान चलाकर महिला सशक्तिकरण का प्रयास किया जा रहा है। किन्तु इन कानूनो से उपर जो अति महत्वपूर्ण विषय है , वह है नैतिक शिक्षा। आज के समाज में समाप्त होते संयुक्त परिवार प्रथा एवं शैक्षणिक संस्थाओं में नैतिक शिक्षा के अभाव ...
आदर्श द्रव और बरनौली सिद्धांत/ बरनौली प्रमेय शैक्षणिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए भौतिक विज्ञान का यह टाॅपिक डाॅ कल्पना सिंह के साथ ऊर्जा संरक्षण नियम पर आधारित बरनौली सिद्धांत, जिसे स्विस भौतिक विज्ञानी डेनियल बरनौली ने दिया था, निम्नवत् है. आदर्श द्रव की धारा रेखीय प्रवाह मे, एकांक आयतन की दाब ऊर्जा, गतिज ऊर्जा एवम स्थितिज ऊर्जा का योग स्थिर रहता है. जिसे निम्न प्रकार से लिख सकते हैं. P 1 + 1/2 ρv 1 2 + ρgh 1 = P 2 +1/2 ρv 2 2 + ρgh 2 या P+ 1/2 ρv 2 + ρgh = नियतांक इसे इस प्रकार भी लिखते है किसी असम्पीड्य और अश्यान द्रव जो कि अपरिवर्ती और अघूर्णी प्रवाह में हो की धारा रेखा के प्रत्येक बिन्दु पर एकांक आयतन की दाब ऊर्जा, गतिज ऊर्जा एवम स्थितिज ऊर्जा का योग स्थिर रहता है. क्यों कि आदर्श द्रव वह है जिसमें निम्न गुण होते हैं 1- असम्पीड्य ( incompressible) - अर्थात प्रवाह के दौरान प्रत्येक बिंदु पर द्रव का घनत्व स्थिर रहता है. 2- अश्यान ( Non- viscous) - अर्थात द्रव की परतों के बीच कोई आंतरिक घर्षण बल नहीं होता है 3- अपरिवर्ती प्रवाह...
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