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वट वृक्ष, स्वरचित पंक्तियाँ द्वारा डाॅ कल्पना सिंह

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                 वट वृक्ष तूफानो में सीना ताने डटे हुए रहते हैं बने वृक्ष वट का हम  धरणी को जकड़े रहते हैं पोषित होकर माँ से हम तरुवर विशाल बनते हैं पथिको के हित तब तो हम शीतल छाया गढ़ते हैं मुझसे होकर ही जीवों के घर जीवन चलते हैं परहित में हम डटे हुए कर्तव्य मगन रहते हैं थक कर मेरे प्रांगण में जब शरण पथिक लेते हैं शीतलता से हम उसकी सारी पीड़ा हरते हैं सीख कहानी वटवृक्षों की हर्षित हम रहते हैं जो भी मुझमें है अर्पण कर जीवन सार्थक करते हैं और अपनी शक्ति पर  फिर फिर गर्वित हम होते हैं तूफानो में सीना ताने डटे हुए रहते हैं स्वरचित पंक्तियाँ द्वारा डाॅ कल्पना सिंह You tube लिंक पर सुनने के लिए क्लिक करें

नारी-गौरव-गरिमा और महिमा

                            नारी-गौरव-गरिमा और महिमा ‘‘ मर्यादा कुर्बानी हूॅ, मै ही मीरा दीवानी हूॅ, शौर्य पूर्ण कहानी हूॅ, वीरो की मै रानी हूॅ, सावन की रिमझिम मै हूॅ, मै चांदनी रात निराली हूॅ, नदियो के लहरो सी हूँ मैं, फॅूलो की खुशबू सी हूॅ, कर्त्तव्यो के प्रागंण में मै, तपती जेठ दोपहरी हूॅ, कर दे प्राण न्योछावर ऐसी  भारत मॉ की प्रहरी हूॅं।’’ विश्व पटल पर भारतीय नारी के गौरव का गान उसमे निहित बहुआयामी दैवीय गुणो के कारण ही होता है, उसके ऐश्वर्य की महिमा न मात्र उसके जीवन काल में अपितु जीवन के पश्चात भी युगो तक कही जाती है, यह तथ्य ही भारतीय नारी की गरिमा को प्रतिबिम्बित करता है। भारतीय नारी का समर्पण एवं सेवाभाव उसे समाज एवं परिवार में महत्वपूर्ण स्थान देता है एवं उसे सबका प्रिय बनाता है। भारतीय नारी की शिक्षा, ज्ञान , संस्कृति एवं आध्यात्मिक प्रवृत्ति उसके गौरवपूर्ण जीवन के सर्वप्रमुख अंग है। उसके साहसिक एवं दृढनिश्चयी गुणो की महिमा का गान सर्वत्र होता है। भारत धर्म एवं वेदो की प्रतिष्ठित भूमि है जिसने वि...