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अगस्त, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

नर्क से स्वर्ग का रास्ता स्वयं तय करना होगा वास्तविक घटना पर आधारित प्रेरक कहानी डाॅ कल्पना सिंह के साथ

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                नर्क से स्वर्ग का रास्ता स्वयं तय करना होगा वास्तविक घटना पर आधारित प्रेरक कहानी डाॅ कल्पना सिंह के साथ एक मध्यम वर्गीय परिवार, जिसका स्वयं का व्यवसाय था, यह व्यवसाय तेजी से प्रगति कर रहा था, परिवार में दो बेटे और माता पिता थे. बेटों को बड़े लाड़ से पाला जा रहा था. घर पर दो बेटे थे, किन्तु फिर भी बेटों की लालसा कम नहीं हुई थी, पर तीसरी बार बेटी हुई, जिससे परिवार बहुत दुखी हुआ, दो बेटे उन्हें प्रिय थे किन्तु एक बेटी का बोझ तो जैसे उन्हें सहन ही नहीं हो रहा था. परिवार के सभी लोग गोरे थे, किन्तु यह बेटी जिसका नाम ऋतु था बहुत पतली और सांवली थी, और होती भी क्यों न उस छोटी बच्ची का ध्यान रखने वाला वहाँ कोई भी नहीं था, सभी अपने अपने विषयों में व्यस्त थे. ऋतु की माँ बात बात पर ऋतु को उसके सांवले रंग के लिए भी ताने देती, उसे अपने साथ लेकर कही भी नहीं जाती थी. ऋतु की छोटी छोटी आवश्यकताओं का भी कोई ध्यान नही दिया जाता था.  ऋतु बड़ी हो रही थी, स्कूल जाना भी शुरू कर दिया था किन्तु केवल स्कूल जाने और खेलने की अवस्था में उसकी माँ ने उसके कंध...

भारत ने स्वतंत्रता के लिए चुकाई थी बड़ी कीमत इसे ध्यान में रखना अनिवार्य इस श्रृंखला में नीरा आर्य के अविस्मरणीय शौर्य और बलिदान पर चर्चा डाॅ कल्पना सिंह के साथ

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             भारत ने स्वतंत्रता के लिए चुकाई थी बड़ी कीमत इसे ध्यान में रखना अनिवार्य इस श्रृंखला में नीरा आर्य के अविस्मरणीय शौर्य और बलिदान पर चर्चा डाॅ कल्पना सिंह के साथ हम भारतीय आज हिन्दुस्तान की धरती पर पूर्ण स्वतंत्रता से जिस हर्षोल्लास का जीवन जी रहे हैं, उसके पीछे हमारे वीर बन्धुओं और वीरांगना भगिनियो का महा बलिदान भुलाया नहीं जा सकता. इन बलिदानों में कुछ नाम तो हमें आज याद है, कुछ कम सुनें गए और कुछ तो अज्ञात बलिदानियों के भी है. किंतु इनमें से किसी का भी बलिदान कमतर नहीं. इन्हीं कम सुने गए नामो में से एक है नीरा आर्य.  आज हम नीरा आर्य की आत्मकथा के आधार पर इनसे जुड़ी घटना पर बात कर इनके बलिदान को श्रद्धांजलि देने के साथ आजादी की कीमत को याद कर दृढ़ संकल्प लेंगे कि इस बलिदान को हम व्यर्थ नही जाने देंगे. नीरा आर्य का जन्म 5 मार्च 1902 को तत्कालीन संयुक्त प्रांत के खेकड़ा नगर में हुआ था, जो अब भारत के बागपत जिले में है. नीरा आर्य के सम्बन्ध में यह जानकारी मिलती है कि इनकी शिक्षा का प्रबंध इनके धर्म पिता सेठ छज्जूमल द्वारा किया गया था, जो ...

बेटी तू मेरा बेटा है स्वरचित पंक्तियाँ डॉ कल्पना सिंह के साथ, महिला समानता दिवस पर विशेष

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                                 बेटी तू मेरा बेटा है स्वरचित पंक्तियाँ डॉ कल्पना सिंह के साथ 26 अगस्त, हम महिला समानता दिवस मना रहे हैं, पर आज भी जब बात महिला को घर और समाज में समान अधिकार, समान सम्मान समान स्थान देने की आती है तो कितने ही प्रश्न उठता खड़े होते हैं. कुछ लोग तो समानता के नाम पर बड़ी बेतुकी बातें करने लगते है, वे महिला पुरुष की शारीरिक संरचना में भिन्नता और सामाजिक आवश्यकता को भूल कर, परिश्रम आदि का राग अलापने लगते, भूल जाते हैं वे कि उनके स्वयं के अस्तित्व के पीछे किसी महिला का कितना बड़ा त्याग है. त्याग उस महिला के सपनों का, कैरियर प्रगति का, स्वास्थ्य का, नींद का. इन सबके बाद भी यह समाज उसे वह सम्मान नहीं देता, परिवार और समाज आज भी कहीं न कहीं उसके विचार और सलाह को उचित मान नहीं देता. रस्मों और परम्पराओं के नाम पर महिलाओं पर ही नियम थोपे जाते है. इस विषय पर तो लम्बी चर्चा हो सकती है, इस लिए इसे विराम देते हुए समर्पित है विषय आधारित यह पंक्तियाँ. बेटी को समता देने को, तुझे बड़ा जिगर कर...

जय हिंद स्वरचित पंक्तियाँ डाॅ कल्पना सिंह के द्वारा

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  जय हिंद स्वरचित पंक्तियाँ डाॅ कल्पना सिंह के द्वारा सुख शांति के लिए, नयी क्रांति के लिए जीत के लिए और ज्ञान के लिए धर्म युक्त वेद का पाठ कर लो जय हिंद जय हिन्दुस्तान कह लो गूढ़ से भी गूढ़ किसी ज्ञान के लिए दृष्टि से परे विज्ञान के लिए हिन्द की धरा पर अभिमान कर लो जय हिंद जय हिन्दुस्तान कह लो जीवन से बड़े किसी त्याग के लिए सागर से भी गहरे प्यार के लिए राम और कृष्ण का ध्यान कर लो जय हिंद जय हिन्दुस्तान कह लो स्वास्थ्य के लिए ,मुक्ति मार्ग के लिए गहरे आनन्द की प्राप्ति के लिए नियमित योग का अभ्यास कर लो जय हिंद जय हिन्दुस्तान कह लो शौर्य के लिए, सम्मान के लिए शत्रु दल के संहार के लिए हिन्द के सपूतों को याद कर लो जय हिंद जय हिन्दुस्तान कह लो कविता सुनने के लिए वीडियो क्लिक करें रचना - डाॅ कल्पना सिंह

गोमुख आसन लाभ, सावधानियां एवं करने का तरीका डॉ कल्पना सिंह के साथ

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                                 गोमुख आसन लाभ, सावधानियां एवं करने का तरीका डॉ कल्पना सिंह के साथ गोमुख आसन दो शब्दों से मिलकर बना है. गो अर्थात गाय और मुख अर्थात मुह. आसन का अर्थ है बैठने की सहज स्थिति. गोमुख आसन करते समय हमारा शरीर गाय के मुख की तरह दिखाई देता है. इस लिए इस आसन को गोमुख आसन कहते हैं. गोमुख आसन करने का तरीका-  -समतल स्थान पर बैठे -दोनों पैरों को सामने फैला लें -रीढ़ की हड्डी सीधी रखे -कंधे झुके हुए न हो -अब दाहिने पैर को घुटने से मोड़ कर इसका पंजा बाएं नितंब के नीचे ले आए.  -फिर बाएं पैर को घुटने से मोड़ कर इस प्रकार रखे कि बाएं पैर का घुटना दाहिने पैर के घुटने के ऊपर रहे और बाएं पैर का पंजा दाहिने नितम्ब के पास रहे -इस स्थिति में दाहिना पैर नीचे और और बायां उसके ऊपर है अब जो पैर ऊपर है, अर्थात बायां, उस हाथ को ऊपर उठाकर, कोहनी से मोड़ते हुए पीठ की तरफ ले जाएगें, तथा दूसरा हाथ कमर के पास से पीठ की तरफ ले जाएगे पीठ की तरफ दोनों हाथों की उंगलियों को फंसा देगे. -रीढ़ सीधी रखते ...

आगामी दशहरा एवं दिपावली की शुभकामनाओं सहित समर्पित स्वरचित पंक्तियाँ- मेरे संग जय श्री राम कहो

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  आगामी दशहरा एवं दिपावली की शुभकामनाओं सहित समर्पित स्वरचित पंक्तियाँ- मेरे संग जय श्री राम कहो जब जब धरती के आंगन में  विध्वंस दिखाई देता है जब देव, दैत्य के प्रांगण में  कर बद्ध दिखाई देता है जब अनाचार का नित तांडव चहुँ ओर दिखाई देता है जब शील सती का धरती पर मजबूर दिखाई देता है जब सीता के अश्रु पर रावण अट्टहास कर हंसता है जब अहंकार सिर पर चढ कर भाई का गौरव हरता है तब ईश्वर को आ धरती पर निज शस्त्र उठाना पड़ता है दश- आनन का खण्ड खण्ड अस्तित्व मिटाना पड़ता है तुम धर्म पक्ष के अनुयायी फिर अनाचार संहार करो कर बद्ध निवेदन है इतना मेरे संग जय श्री राम कहो रचना- डाॅ कल्पना सिंह कविता सुनने के लिए यू ट्यूब विडियो पर क्लिक करें

शाम्भवी मुद्रा- शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए

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  शाम्भवी मुद्रा- शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए शाम्भवी मुद्रा - चमत्कारिक रूप से मस्तिष्क क्षमता एवं मेमोरी बढ़ाने के लिए शाम्भवी मुद्रा को शिव मुद्रा या भैरवी मुद्रा भी कहते हैं, यह एक ऐसी मुद्रा है जिसके माध्यम से चमत्कारिक शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक सामर्थ्य प्राप्त किया जा सकता है. शाम्भवी मुद्रा करने का तरीका -  सुख आसन, पद्मासन या जो भी स्थिति आप के लिए सहज हो, उसमें बैठे. रीढ़ की हड्डी को सीधा करे. कंधे खिचे हुए किन्तु सहज रहे. दोनों हाथों में तर्जनी को अंगूठे से मिलाकर गोला बनाए, अर्थात ज्ञान मुद्रा की स्थिति. अन्य तीनों उंगलियाँ सीधी एवं सटी हुयी रहे. इस अवस्था में हथेली ऊपर की तरफ किए हुए घुटनों पर टिका ले. अब चेहरा कुछ नीचे झुकाएँ. दोनों आंखों से भौहों के मध्य अर्थात आज्ञा चक्र में देखने का प्रयास करे. अब चेहरे को धीरे धीरे थोड़ा ऊपर की ओर उठाएं, ध्यान रखें कि आंखों का फोकस आज्ञा चक्र पर बना रहे. जब इतने अभ्यास में पारंगत हो जाए तब शाम्भवी मुद्रा करते समय आंखों को धीरे धीरे बन्द करने का अभ्यास करें बन्द आंखों से की गई यह मुद्रा अंत...