भाग्य शिल्पकार स्वरचित पंक्तियाँ डॉ कल्पना सिंह के साथ, साथ है शिक्षक शिष्य सम्बन्ध विशेष कविता
भाग्य शिल्पकार
स्वरचित पंक्तियाँ
डॉ कल्पना सिंह के साथ
कर्म की कलम से प्रारब्ध लिख रहे हैं
हम भाग्य शिल्पकार है सौभाग्य रच रहे हैं
धरती हो या गगन हो वायु हो या अगन हो
रण वेदिका पर प्रतिदिन पुरुषार्थ से समर हो
संतति प्रभु तुम्हारे तेरा नाम कर रहे हैं
हम भाग्य शिल्पकार है सौभाग्य रच रहे हैं
पर्वत विशाल हो या गहरी खुदी हो खाई
संकल्प शक्ति लेकर अपनी लड़ो लड़ाई
पग डग मे हम अटल कर इतिहास रचा रहे हैं
हम भाग्य शिल्पकार है सौभाग्य रच रहे हैं
कठिनाईयां हो कैसी रुकते नहीं कदम हो
जीवन सलिल से ऊपर कर्तव्य की तपन हो
चैतन्य बन प्रभु हम तेरा काम कर रहे हैं
हम भाग्य शिल्पकार है सौभाग्य रच रहे हैं
रचनाकार डाॅ कल्पना सिंह
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