महिलाओं के प्रति आम होते जघन्य अपराध एवं विधिक सुरक्षा

 

डॉ कल्पना सिंह                    


 

 

महिलाओं के प्रति आम होते जघन्य अपराध एवं विधिक सुरक्षा

हम यहॉ सम्पूर्ण स्वास्थय की बात करते है।

आज के इस लेख में हम एक ऐसे मुद्दे पर बात करेगें, जो समाज के स्वास्थय को बनाए रखने के लिए नितांत आवश्यक है और वह है महिला सुरक्षा से सम्बन्धित कानूनों की जानकारी।

इन कानूनो पर चर्चा से पूर्व, मै एक महत्वपूर्ण बात करना चाहूॅगी। कानून बनाना एवं उसकी जानकारी तथा प्रयोग, समाज में महिलाओं के विरूद्ध हो रहे अपरध रोकने के लिए अति महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से उत्तर प्रदेश में मिशन शक्ति अभियान चलाकर महिला सशक्तिकरण का प्रयास किया जा रहा है। किन्तु इन कानूनो से उपर जो अति महत्वपूर्ण विषय है, वह है नैतिक शिक्षा। आज के समाज में समाप्त होते संयुक्त परिवार प्रथा एवं शैक्षणिक संस्थाओं में नैतिक शिक्षा के अभाव का प्रभाव चारो तरफ देखा जा रहा है। उस पर भी विभिन्न टीवो चैनलो एवं फिल्मो के माध्यम से बचपन से ही बच्चो को परोसी जा रही सामग्री, आग में घी का काम कर रही है।

कहा जाता है कि ’’जैसा खाए अन्न वैसा रहे मन’’

यहॉ मात्र अन्न की बात है, किन्तु मै चर्चा करती हूॅ कि आहार वह सब कुछ है जो हम अपने ज्ञानेन्द्रियों (दृष्टि, श्रवण, गंध, स्वाद, स्पर्श) के माध्यम से ग्रहण करते है, यह आहार हमारे विचार एवं व्यवहार निर्धारित करता है।

तो यदि बच्चों को मिल रहा आहार ही निकृष्ट है, तो उत्कृष्ट व्यवहार की अपेक्षा करना उचित नही है। यहॉ मै स्पष्ट करना चाहती हूॅ कि नैतिक शिक्षा मात्र महिलाओं के लिए नही है, अपितु स्त्री-पुरूष सभी के लिए समान रूप से आवश्यक है महिलाओं के साथ अपराध रोकने के लिए पुरूष की नैतिक शिक्षा अनिवार्य है नियमों/कानूनो की जानकारी होना आवश्यक है एवं लाभकारी है किन्तु यह वृक्ष के फल, पत्ते, डालियो की देखभाल करने जैसा है, पूर्ण लाभ के लिए जड़ो पर ध्यान देना होगा। अर्थात् नैतिकता का विकास करना होगा।

महिलाओ के प्रति आज के समाज में आम होते अपराध :-

1- छेड़छाड़ या नारी शोषण (eve teasing) & वासनात्मक संकेत करना, टिप्पणी करना, सार्वजनिक स्थानों पर महिला को छूकर निकलना, सीटी बजाना, अश्लील गाने गाना आदि जैसी घटनाए जिनके पीछे कामुकता होती है, छेड़छाड़ या नारी शोषण (eve teasing) की श्रेणी में रखा जाता है। वस्तुतः इसे छोटे बलात्कार का नाम दिया जा सकता है। जहॉ पुरूष कामवासनाओं से ग्रसित हो महिला को मानसिक/सामाजिक/भावनात्मक/शारारिक पीड़ा पहुॅचाता है।

2- यौन उत्पीड़न और यौन शोषण (Sexual harassment and sex abuse) :- किसी भी तरह की यौन गतिविधि जिसमें पीड़ित की सहमति हो, यौन उत्पीड़न कहलाता है। इसमें किसी व्यक्ति को उसकी मर्जी के बिना छूना, जबरदस्ती करना, शारारिक रूप से यौन सम्बन्धी कार्य करने के लिए विवश करना शामिल है।

यौन शोषण किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसे यौन क्रिया में सलंग्न करने के लिए बल प्रयोग, उसे पकड़ना, घूरना, रास्त रोकना, सेक्सुअल लाइफ के बारे में पूछना, फोन पर अशोभनीय बाते करना, छूना और चूमना, देखकर सीटी बजाना है।

3- पीछा करना(Stalking)

4- स्त्री की लज्जा भंग करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल प्रयोग करना (assault or criminal force to women with intent to outrage her modesly )

5- महिला के साथ दास के समान व्यवहार करना

6- वैश्यावृत्ति के लिए 18 वर्ष से कम आयु की बालिका को बेचना या भाड़े पर देना

7- वैश्यावृत्ति के लिए 18 वर्ष से कम आयु की बालिका को खरीदना

8- महिला तस्करी (women trafficking) मानव तस्करी का ही एक भाग है, महिला तस्करी। मानव तस्करी अलग-अलग उद्देश्य से की जाती है। इसके अंतर्गत महिलाओं एवं बालिकाओं की तस्करी (उन्हे बाजार में बेचना एवं खरीदना) विभिन्न उद्देश्य से की जाती है जैसे वेश्यावृत्ति, जबरदस्ती श्रम आदि।

9- बलात्कार (Rape)  :- किसी की सहमति के बिना उसके साथ शारारिक सम्बन्ध स्थापित करना बलात्कार है। यह सबसे घिनौने प्रकार के अपराधो में आता है। इसकी सजा उम्रकैद या फांसी भी हो सकती है।

10- व्यपहरण(Kidnapping) एवं अपरहण(abduction)  :- व्यपहरण अर्थात् (Kidnapping) हमेशा 16 वर्ष से कम आयु के बालक, 18 वर्ष से कम आयु की बालिका या किसी भी उम्र के विकृत चित्त व्यक्ति का किया जा सकता है। इनको बहला फुसलाकर या इनकी सहमति से अपने साथ ले जाना, व्यपहरण(Kidnapping) है।

किसी भी उम्र के , उपरोक्त के अतिरिक्त, सामान्य मानसिक स्तर के व्यक्ति को बलपूर्वक/कपटपूर्वक अपने साथ ले जाना अपहरण (abduction) है।

व्यपहरण एवं अपहरण दोनो ही व्यक्ति को उसके विधिक संरक्षक की अनुमति के बिना, अपने साथ ले जाना एवं विधिक संरक्षक से दूर करना है। व्यपहरण एवं अपहरण में मुख्य अन्तर आयु का है।

 

11- महिला की इच्छा के विरूद्ध गर्भपात करवाना।

12- महिला की इच्छा के विरूद्ध गर्भपात के उद्देश्य से किए गए विभिन्न कृत्य

13- शिशु जन्म रोकना या जन्म के पश्चात उसकी मृत्यु के उद्देश्य से किए गए कार्य जिससे शिशु की मृत्यु सम्भव हो।

14- नवजात बच्चे को मार देना एवं शिशु के जन्म को छिपाने के उद्देश्य से उसके मृत शरीर को गाड़ देना।

15- दहेज हत्या (Dawry death)&दहेज की मॉग पूरी होने पर दुल्हन की हत्या

16- घरेलू हिंसा(Domestic violence)& सहवास अथवा विवाह जैसे बंधनो के बाद घरेलू स्तर पर एक साथी का दूसरे साथी के साथ गाली गलौज, मारपीट या किसी अन्य प्रकार का दुर्व्यहार करना घरेलू हिंसा है। घरेलू हिंसा के शारारिक, आर्थिक, यौन शोषण, भावनात्मक, मानसिक विभिन्न रूप हो सकते है।

17- सम्मान हत्या या ऑनर किलिंग -परिवार के किसी सदस्य विशेष रूप से महिला सदस्य की उसके सगे सम्बन्धियो द्वारा की जाने वाली हत्या, ऑनर किलिंग है। यह हत्याए प्रायः परिवार और समाज की प्रतिष्ठा के नाम पर की जाती है। इसमें स्त्री पुरूष दोनो ही पीड़ित हो सकते है, किन्तु स्त्री मुख्य रूप से पीड़ित हो रही है।

18- एसिड अटैक(acid attack)- यह किसी व्यक्ति पर तेजाब फेकने की घटना है। इस घटना की शिकार भी सामान्यतः महिलाए ही होती है। वहीं ज्यादातर घटनाए एकतरफा इश्क के कारण भी देखी जाती है। एसिड अर्थात् तेजाब से हमला मात्र शरीर को कष्ट देता है, अपितु पीड़ित की आत्मा को भी जला डालता है, क्योकि एसिड से नष्ट हुए शरीर के साथ जीना मृत्यु से भी अधिक कष्ट दायक होता है।

19- साइबर क्राइम(cyber crime)- कम्प्यूटर और नेटवर्क से जुड़े अपराध साइबर अपराध कहलाते है। कम्प्यूटर अपराध वे अपराध है, जिनमें नेटवर्क सम्मिलित नही होता है जैसे कम्प्यूटर से जानकारी चोरी करना, जानकारी किसी अन्य को देना, सूचना में फेरबदल कर देना या नष्ट कर देना, कम्प्यूटर के भागो की चोरी आदि। साइबर अपराध भी कई तरह के है, जैसे पोनोग्राफी(कामोद्दीपक चित्र), बदमाशी(bullying), गाली देना(abuse), स्पैम ईमेल, हैकिंग, फिशिंग, ऑनलाईन जानकारी चोरी करना, वायरस के द्वारा सूचना एवं कम्प्यूटर नष्ट करना आदि।

साइबर अपराध के शिकार स्त्री पुरूष सभी हो सकते है। किन्तु महिलाओ के साथ साइबर अपराध अधिक देखा जाता है।

महिलाओ को सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से भारत मे लागू नियम/कानून-

भारतीय संविधान में ही महिलाओं को सुरक्षा एवं समान अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से प्रावधान किया गया है। किन्तु आज के लेख में हम स्वयं को मुख्य रूप से उपरोक्त वर्णित अपराधो से महिलाओ/बालिकाओ को सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से लागू IPC की धाराओ पर केन्द्रित करेगें। IPC अर्थात Indian Penel Code अर्थात भारतीय दण्ड संहिता या ताज इरात--हिन्द।

-छेड़छाड़+ (eve teasing) से सुरक्षा देने के उद्देश्य से धारा 509 यदि कोई व्यक्ति किसी स्त्री की लज्जा/शील का अनादर करने के आशय से कोई शब्द कहता है, कोई ध्वनि करता है या अंग विक्षेप करता है या कोई वस्तु प्रदर्शित करता है, एवं वह व्यक्ति ऐसा इस उद्देश्य से करता है कि वह शब्द या ध्वनि स़्त्री द्वारा सुनी जाए अथवा अंग विक्षेप या वस्तु स्त्री द्वारा देखी जाए अथवा वह व्यक्ति स्त्री की एकांतता का अतिक्रमण करता है, तो उसे धारा 509 के अर्न्तगत दण्डित करने का प्रावधान है। इसके अंतर्गत दोषी व्यक्ति को साधारण कारावास की सजा दी जा सकती है। जिसे अधिकतम तीन वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, या दोषी को आर्थिक दण्ड दिया जा सकता है अथवा दोनो प्रकार के दण्ड से दण्डित किया जा सकता है।

यह एक जमानती, संज्ञेय अपराध है और यह किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। यह अपराध अदालत की अनुमति से पीड़ित महिला द्वारा समझौता करने योग्य है।

-महिलाओ के साथ घटित होने वाले उपरोक्त वर्णित अपराधो में से बिन्दु 2(यौन उत्पीड़न एवं यौन शोषण), बिन्दु 3(पीछा करना), बिन्दु 4(स्त्री की लज्जा भंग करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल प्रयोग करना) के अपराधो से महिलाओ को सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से IPC की धारा 354 के विभिन्न भागो का प्रयोग होता है। धारा 354 में छेडछाड़ के अलग-अलग अपराध के लिए दण्ड के अलग-अलग प्रावधान है। जो उपरोक्त बिन्द 2, 3 एवं 4 के अपराधो की स्थिति में दण्ड की व्याख्या करते है।

धारा 354, स्त्री की लज्जा भंग करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल प्रयोग से सम्बन्धित है। इसके अंतर्गत दोषी को एक साहल से लेकर अधिकतम 5 वर्ष तक कारावास और अर्थ दण्ड की सजा का प्रावधान है। यह गैर जमानती अपराध है। आपराधिक कानून(संशोधन) अधिनियम, 2013 द्वारा धारा 354 की चार उप धाराए जोड़ी गई है।

354A, 354B, 354C, 354D

पुनः 354 के चार किए गए

354 A(Part 1), 354A(Part 2), 354A(Part 3), 354A(Part 4)

354 A(Part 1)- यदि केई व्यक्ति किसी महिला को सेक्सुअल नेचर का फिजिकल टच(शारारिक स्पर्श) करता है, उसे धारा 354 A(Part 1) के अंतर्गत दण्डित करने का प्रावधान है। तीन साल कैद की सजा हो सकती है।

354A(Part 2)- किसी व्यक्ति द्वारा किसी महिला से सेक्सुअल डिमाण्ड करने पर 354A(Part 2) के अंतर्गत तीन वर्ष कैद की सजा हो सकती है।

354A(Part 3)- किसी महिला की सहमति के बिना उसे पोर्न दिखाने पर उस व्यक्ति को 354A(Part 3) के अंतर्गत तीन वर्ष की कैद की सजा हो सकती है।

354A(Part 4)- किसी महिला के लिए सेक्सुलिटी सम्बन्धित कमेंट करने वाले व्यक्ति को धारा 354A(Part 4) के अर्न्तगत दण्डित करते हुए एक साल तक कैद की सजा दी जाती है।

354 B - यदि कोई व्यक्ति किसी महिला को जबरन(बलपूर्वक) निर्वस्त्र करता है या ऐसे कृत्य के लिए उकसाता है, तो उसे धारा 354 B के अंतर्गत 3 से लेकर 7 साल तक कैद की सजा हो सकती है। यह गैर जमानती अपराध की श्रेणी में आता है।

354 C - यदि कोई व्यक्ति किसी महिला के प्राइवेट एक्ट का फोटो लेता है या उसे बांटता है, तो उसे धारा 354 C के तहत दोषी मानते हुए एक से तीन वर्ष तक कैद की सजा हो सकती है। ऐसे कृत्य में दूसरी बार दोषी पाये जाने पर उसे 3 से 7 वर्ष तक कैद की सजा हो सकती है। यह भी गैर जमानती अपराध की श्रेणी में आता है।

354 D - यदि कोई व्यक्ति किसी महिला का पीछा करता है और सम्पर्क (कान्टैक्ट) करने का प्रयास करता है, तो उसे धारा 354 D के अंतर्गत दण्डित करते हुए तीन वर्ष कैद की सजा हो सकती है।

-बलात्कार जैसे जघन्य अपराध से महिला को सुरक्षा देने के उद्देश्य से इस अपराध के लिए दोषी व्यक्ति को दण्डित करने के लिए  की धारा 376 का प्रावधान है। 

धारा 376- धारा 376 की दो उप धाराए है। पहली उपधारा के अंतर्गत साधारण मामलों में बलात्कार के लिए दोषी व्यक्ति को कम से कम 7 वर्ष और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है।

धारा 376 की उपधारा 2 में बलात्कार के विशेष मामले आते है। इस धारा के अंतर्गत दोषी व्यक्ति को 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास की सजा हो सकती है। वर्णित विशेष परिस्थितियॉ निम्नवत् है।

पुलिस अधिकारी द्वारा बलात्कार

सशस्त्र बलों के सदस्य द्वारा बलात्कार

जेल, सुधार गृह आदि के कर्मचारियों द्वारा बलात्कार

अस्पताल के प्रबंधकर्ता कर्मचारियों द्वारा बलात्कार

रिश्तेदार/संरक्षक/शिक्षक द्वारा बलात्कार

साम्प्रदायिक हिंसा के दौरान बलात्कार

गर्भवती स्त्री से बलात्कार

सहमति देने में असमर्थ स्त्री से बलात्कार

किसी स्त्री से बार-बार बलात्कार

मानसिक या शारारिक रूप से असमर्थ स्त्री से बलात्कार

बलात्कार के साथ किसी स्त्री को गम्भीर शारारिक चोट देना

धारा 376A- यदि बलात्कार के दौरान किसी स्त्री की मृत्यु हो जाती है या उसकी स्थिति विकृतशील हो जाती है, तो दोषी को धारा 376A के तहत न्यूनतम 20 वर्ष कारावास और अधिकतम मृत्यु दंड तक दिया जा सकता है।

धारा 376B- पति यदि पृथक्करण के दौरान अपनी पत्नि के साथ उसकी सहमति के बिना शारारिक सम्बन्ध बनाता है, ऐसी स्थिति में पति को धारा 376B के तहत दोषी मानते हुए न्यूनतम 2 वर्ष कारावास और अधिकतम 7 वर्ष कारावास के साथ अर्थदण्ड दिया जा सकता है।

धारा 376C- किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा जिसका किसी स्त्री के साथ विश्वास का रिश्ता हो, यदि स्त्री का बलात्कार किया जाता है, तो उस व्यक्ति को धारा 376C के अंर्तगत न्यूनतम 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष के कारावास से दंडित किया जा सकता है। ऐसा व्यक्ति लोक सेवक, अस्पताल के प्रबंध तंत्र का कर्मचारी, विधवा गृह या सुधार गृह का प्रबंधक आदि हो सकता है।

धारा 376D- भारतीय दण्ड संहिता की धारा 376D के अंतर्गत सामूहिक बलात्कार के दोषी व्यक्तियों को दण्डित करते हुए कम से कम 20 वर्ष कठोर कारावास से आजीवन कारावास तक दिया जा सकता है।

धारा 376E- आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम 2013 के द्वारा बलात्कार को व्यापक रूप से परिभाषित करते हुए अन्य धाराओ के साथ धारा 376E को जोड़ा गया। ऐसे अपराधी जो 376, 376 तथा 376डी के अंतर्गत बार-बार अपराध करते हुए पाए जाते है, उनके लिए धारा 376E के तहत मृत्यु दंड का प्रावधान किया गया है।

धारा 376DA- इसके अंतर्गत 16 वर्ष से कम आयु की स्त्री से सामूहिक बलात्कार के दोषी व्यक्तियो को अंतिम सांस तक कारावास और जुर्माने की सजा या फिर मृत्यु दंड तक दिये जाने का प्रावधान है।

धारा 376DB- इसके अंतर्गत 12 वर्ष से कम आयु की स्त्री से सामूहिक बलात्कार के दोषियो को धारा 376DB के तहत अंतिम सांस तक कारावास या फिर मृत्यु दंड का प्रावधान है। इस मामले में जुर्माना स्त्री को दिये जाने का प्रावधान है।

दोबारा बलात्कार के दोषी के लिए सजा - ऐसा व्यक्ति जिस पर एक बार बलात्कार का दोष सिद्ध हो चुका है। पुनः बलात्कार करता है, तो उसे आजीवन कारावास या फिर मृत्यु दंड से दंडित किया जा सकता है। आजीवन कारावास का अर्थ शेष जीवन के कारावास से है।

-व्यपहरण(Kidnapping) एवं अपरहण(abduction) से सुरक्षा प्रदान करने हेतु आई.पी.सी. की धाराए :-

धारा 359- व्यपरहरण या ¼Kidnapping) के प्रकार बताती है(परिभाषा नही)

               यह दो प्रकार का है -भारत में से व्यपहरण

                                                विधि पूर्ण संरक्षण में से व्यपरहण

धारा 360- यह धारा भारत में से व्यपरहण को परिभाषित करती है, अर्थात् किसी व्यक्ति को उसके संरक्षक की अनुमति के बिना , भारत से उठा कर भारत की सीमाओ के बाहर ले जाना। वह व्यक्ति जिसका व्यपहरण हुआ है, निर्धारित आयु सीमा या निर्धारित चित्त सीमा का होगा।

धारा 361- यह धारा विधि पूर्ण संरक्षण से व्यपहरण के सम्बन्ध में विशेष तत्वो को लिखित करती है।

धारा 362- धारा 362 में अपहरण के अपराध का उल्लेख किया गया है, इसके अनुसार यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को किसी स्थान से जाने के लिए बलपूर्वक विवश कर देता है या बल पूर्ण उपायो द्वारा ऐसा करने के लिए प्रेरित करता है, तो यह कृत्य पहले व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति का अपहरण कहलाता है।

धारा 363- व्यपहरण के अपराधी के लिए कारावास की अवधि अनेक प्रकार से निर्धारित की गई है।

धारा 363 के अंतर्गत, सामान्य रूप से व्यपहरण के अपराध के लिए दंड का उल्लेख करते हुए अपराधी के लिए 7 वर्ष कारावास के दंड का प्रावधान दिया गया है। इस धारा में धारा 360 एवं 361 में परिभाषित अपराधो के लिए दंड की व्यवस्था की गई है।

धारा 363A- भीख मॉगने के प्रयोजन से अवयस्क के व्यपहरण से सम्बन्धित है। इस धारा के अनुसार यदि कोई बच्चे की चोरी केवल भीख मागने के उद्देश्य से करता है, तो 10 वर्ष तक के कारावास के दंड का प्रावधान है, किन्तु यदि चोरी किये गए बालक/बालिका के अंगो को काट कर उसको दया का पात्र बनाया जाता है, तो इस स्थिति में आजीवन कारावास के दंड का प्रावधान है।

धारा 364- IPC की धारा 364 हत्या के उद्देश्य से व्यपहरण या अपहरण को दंडनीय घोषित करता है। आजीवन कारावास या किसी एक अवधि के लिए कठिन कारावास जिसे दस वर्ष तक बढाया जा सकता है, से अपराधी को दण्डित किया जा सकता है।

धारा 364A- फिरौती आदि के लिए अपहरण या व्यपहरण से सम्बन्धित धारा है। इसके अंतर्गत मृत्यु दंड या आजीवन कारावास और अर्थ दंड का प्रावधान है। यह गैर जमानती अपराध है।

धारा 365- IPC की धारा 365 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को अनुचित रूप से कैद करने के आशय से व्यपहरण या अपहरण करता है, तो उस व्यक्ति को एक अवधि के लिए कारावास जिसे 7 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, से दंडित करने के साथ अर्थदण्ड भी लगाया जा सकता है।

धारा 366- यदि कोई व्यक्ति किसी महिला को विवाह के लिए विवश करने के उद्देश्य से व्यपहरण या अपहरण करता है, तो उस व्यक्ति को धारा 366 के अंतर्गत दण्डित करते हुए 10 वर्ष तक कारावास दिया जा सकता है।

धारा 366A- यह धारा किसी अवयस्क लड़की को संभोग के उद्देश्य से उठा ले जाने के संदर्भ मे है। इस अपराध के लिए 10 वर्ष के कारावास का प्रावधान है।

धारा 371- के अनुसार, यदि कोई अभ्यासतः दासो का आयात निर्यात करता है, खरीदता बेचता है या दास का व्यवहार करता है, तो उसे आजीवन कारावास या किसी विशेष अवधि के कारावास जिसे 10 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, से दण्डित करने के साथ अर्थदण्ड भी लगाया जा सकता है। इस अपराध से भी पीड़ित होने वालों मे महिलाओ की संख्या अधिक है। यह अपराध गैर जमानती, संज्ञेय है। अतः धारा 371 महिलाओं के साथ दास के समान व्यवहार को रोकता है।

-वेश्यावृत्ति-

धारा 372- IPC की इस धारा के अनुसार यदि कोई व्यक्ति किसी नाबालिग (18 वर्ष से कम आयु के) व्यक्ति (विशेष रूप से बालिकाए प्रभावित होती है), को इस आशय से कि वह व्यक्ति किसी आयु में वेश्यावृत्ति या किसी प्रकार संभोग या विधि विरूद्ध दुराचारिक कार्य के लिए उपयोग किया जाए, बेचता या भाड़े पर देता है, तो उस व्यक्ति को जो यह अपराध करता है, किसी अवधि के लिए कारावास जिसे 10 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, से दण्डित करते हुए आर्थिक दण्ड भी दिया जा सकता है।

धारा 373- उपरोक्त धारा 372 के अंतर्गत जिस अपराध के लिए बेचने वाले या भाड़े पर देने वाले को दण्डित किया गया, उसी अपराध के लिए खरीदार या भाड़े पर लेने वाले को धारा 373 के अनुसार एक अवधि के कारावास जिसे 10 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, से दण्डित करते हुए अर्थदण्ड भी लगाया जा सकता है।

-महिला तस्करी - रोकने से सम्बन्धित IPC की धाराए

धारा 370- के अनुसार मानव तस्करी का अपराधी, कम से कम 7 वर्ष कठोर कारावास जिसे 10 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, से दण्डित किया जाएगा। साथ ही अर्थदण्ड का भी प्रावधान है।

धारा 370A- यह धारा दुर्व्यापार के कारण किए गए शोषण पर दण्ड का प्रावधान करती है। यदि दुर्व्यापार के कारण किसी व्यक्ति का शोषण होता है, तो अपराधी को शोषण के अपराध के लिए कम से कम 5 वर्ष और अधिकतम 7 वर्ष के कारावास का दण्ड दिया जा सकता है।

उपरोक्त वर्णित धारा 372 एवं धारा 373 भी महिला तस्करी से सम्बन्धित है।

-गर्भपात एवं शिशु हत्या

धारा 313- भारतीय दंड संहिता की इस धारा के अनुसार कोई भी यदि किसी स्त्री के सहमति के बिना उसका गर्भपात कारित करता है, तो उस अपराधी को आजीवन कारावास, या किसी एक अवधि के लिए कारावास, जिसे 10 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, से दण्डित करने के साथ अर्थदण्ड भी लगाया जा सकता है। यह गैर जमानती, संज्ञेय अपराध है।

धारा 314- भारतीय दंड संहिता की धारा 314 के अनुसार यदि कोई किसी गर्भवती स्त्री के गर्भपात के आशय से कोई ऐसा कार्य करता है, जिससे उस स्त्री की मृत्यु हो जाए, तो अपराधी को किसी एक अवधि के कारावास जिसे दस वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, से दण्डित करने के साथ अर्थदण्ड दिया जा सकता है।

धारा 315- वह व्यक्ति जो किसी शिशु को जीवित पैदा होने से रोकने या जन्म के पश्चात उसकी मृत्यु के उद्देश्य से कोई कार्य करता है और यह कार्य माता के जीवन को बचाने के प्रयोजन से सदभावपूर्वक नही किया गया हो, तो उस व्यक्ति को धारा 315 के अंर्तगत एक अवधि के लिए कारावास जिसे दस वर्ष तक बढ़ा सकते है या अर्थदण्ड या दोनो से दण्डित किया जा सकता है। यह गैर जमानती, संज्ञेय अपराध है।

धारा 316- इस धारा के अनुसार यदि कोई व्यक्ति ऐसा कार्य करता है, जिससे सजीव अजन्मे शिशु की मृत्यु हो जाती है, तो उसे एक अवधि के कारावास जिसे दस वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, से दण्डित करने के साथ आर्थिक दण्ड भी दिया जा सकता है। यह गैर इरादतन हत्या की कोटि का गैर जमानती, संज्ञेय अपराध है।

धारा 317- भारतीय दण्ड संहिता की इस धारा के अनुसार यदि कोई 12 वर्ष से कम आयु के शिशु का पिता या माता या संरक्षक होते हुए शिशु के परित्याग के आशय से शिशु को किसी स्थान में अरक्षित डाल देता है, तो उसे किसी अवधि के लिए कारावास जिसे 7 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है या अर्थदण्ड या दोनो से दण्डित करने का प्रावधान है।

धारा 318- यदि कोई व्यक्ति किसी शिशु के मृत शरीर को गुप्त रूप से गाड़कर या अन्यथा व्ययन करके, चाहे ऐसे शिशु की मृत्यु उसके जन्म से पूर्व या पश्चात या जन्म के समय हुई हो, शिशु के जन्म को छिपाएगा या छिपाने का प्रयास करेगा, तो उसे दो वर्ष कारावास या आर्थिक दण्ड या दोनो से दण्डित किया जा सकता है। यह गैर जमानती, संज्ञेय अपराध है।

-दहेज हत्या -

भातीय दण्ड संहिता की धारा 304 बी दहेज हत्या से सम्बन्धित है, इसके अनुसार यदि किसी स्त्री की मृत्यु जलने या शारारिक क्षति के द्वारा या विवाह के सात वर्ष के भीतर सामान्य परिस्थितियो से अन्यथा होती है, तो माना जाता है कि उसकी मृत्यु के पूर्व उसके पति या पति के रिश्तेदार ने दहेज मांग को लेकर स्त्री के साथ क्रूरता की थी। ऐसे दोषी को कम से कम 7 वर्ष से आजीवन कारावास तक का दण्ड दिया जा सकता है। 

-घरेलू हिंसा -

घरेलू हिंसा के विरूद्ध महिला संरक्षण अधिनियम, 2005, द्वारा पीड़ित -संरक्षण आदेश, आर्थिक राहत, बच्चो के अस्थाई संरक्षण का आदेश, निवास एवं मुआवजे का आदेश जैसे राहत के लिए आवेदन कर सकती है।

पीड़ित, आधिकारिक सेवा प्रदाताओ की सहायता ले सकती है।

पीड़ित, संरक्षण अधिकारी से सम्पर्क कर सकती है।

वह निशुल्क काननी सहायता की मांग कर सकती है।

वह IPC के तहत क्रिमिनल याचिका भी दाखिल कर सकती है, जिसके अंर्तगत गम्भीर शोषण सिद्ध होने पर प्रतिवादी को तीन वर्ष तक का कारावास हो सकता है।

-भारतीय दण्ड संहिता मे अॅानर किलिंग को लेकर अलग से कोई धारा नही है। इसमे भी, दूसरी हत्याओं मे लगने वाली आई पी सी की धारा 300 ही लागू होती है।

-एसिड अटैक - पहले ,एसिड अटैक के लिए अलग से कोई प्रावधान नही था। आई पी सी की धारा 326 , गंभीर रूप से जख्मी करना, के तहत ही केस होता था। बाद मे आई पी सी की धारा 326 एव 326 बी के द्वारा अलग प्रावधान हुआ।

धारा 326 - यदि कोई जानबूझ कर दूसरे व्यक्ति पर तेजाब फेंककर स्थाई या अांशिक रूप से नुकसान पहुंचाता है तो यह गैर जमानती अपराध होगा,जिसके लिए कम से कम 10 वर्ष और अधिकतम उम्र कैद हो सकती है। दोषी पर उचित जुर्माने का भी प्रावधान है, यह रकम पीड़िता को दिए जाने का भी प्रावधान है।

धारा 326 बी- इसके अनुसार यदि एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति पर तेजाब अर्थात एसिड फेंकने का प्रयास करता है, तो यह भी गैर जमानती अपराध होगा और दोषी को कम से कम पांच वर्ष कारावास हो सकती है साथ ही जुर्माना भी देना पड़ सकता है।

-साइबर क्राइम-

साइबर क्राइम से सुरक्षा देने के उद्देश्य से विभिन्न कानूनी प्रावधान है। यह अलग एक बड़ा विषय है। यहां इस पर विस्तृत चर्चा नही करूगी। मुख्य प्रावधान निम्न है-

साम्प्रदायिकता फैलाने के मामले मे- आई टी , संसोधन, कानून 2009 की धारा 66 के तहत तीन साल की कैद और/या जुर्माना हो सकता है।

चाइल्ड पोर्नोग्राफी के लिए आई टी , संसोधन, कानून 2009 की धारा 67 बी, एवं आई पी सी की धाराएं 292, 293, 294, 500, 506, 509 के अंतर्गत पहली बार अपराध होने पर 5 वर्ष कारावास और/या जुर्माना दस लाख रूपए तक तथा दूसरी बार अपराध होने पर 7 वर्ष कारावास  और/या जुर्माना दस लाख रूपए तक का प्रावधान है।

कापी राइट कानून 1957 की धारा 14, 63 बी के तहत 7 दिन से तीन साल तक जेल और/या 50 हजार से दो लाख रूपए तक अर्थदण्ड का प्रावधान है।

 

यहॉ मै मेरे चैनल पर उपलब्ध कुछ संबंधित वीडियो के लिंक आप की सहायता के लिए दे रही हूॅ।


 

























 

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