स्वरचित प्रेरक पंक्तियाँ फिर सूर्य उदित होगा डॉ कल्पना सिंह के द्वारा
स्वरचित प्रेरक पंक्तियाँ
फिर सूर्य उदित होगा
डॉ कल्पना सिंह के द्वारा
प्रेरणा, प्रयास और कर्म जो जीवन की दिशा और दशा बदल दे. ऐसी ही प्रेरणादायी नवसृजित पंक्तियाँ समर्पित करती हूँ.
यह रात भले ही काली है
दिल को दहलाने वाली है
घनघोर अँधेरा छाया है
पर सूरज न ठंढाया है
कर्म श्रेष्ठ करना होगा
तुझे भाग्य नया लिखना होगा
फिर चीर अंधेरा राहों का
तुझे जीवन सा सजना होगा
सोना अग्नि में तपता है
कुन्दन बन तभी दमकता है
तलवार जो रेती जाती है
उपयुक्त वही बन पाती है
जो बोया था वह काट रहे
सिद्धांत कर्म का याद रहे
सरिता सा पावन बनना है
इस लिए तुझे फिर बहना है
सूरज फिर वही उदित होगा
तेरा हर लक्ष्य विजित होगा
निर्जन में सृजित चमन होगा
पुष्पित आनंद सुमन होगा
तुझे धैर्य मगर धरना होगा
बन सूरज फिर उगना होगा
तुझे बिना रुके चलना होगा
तुझे लक्ष्य भेद करना होगा
रचनाकार डाॅ कल्पना सिंह
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Wahhh
जवाब देंहटाएंBahuttttt badia
जवाब देंहटाएंAti sundar manamohaka
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