समय के बारे में मुख्य बातें, जो न मात्र हमारी सफलता सुनिश्चित करती है अपितु हर कदम पर हमे सशक्त बनाए रख कर किसी भी प्रकार के निराशा से बचाती है
समय के बारे में मुख्य बातें, जो न मात्र हमारी सफलता सुनिश्चित करती है अपितु हर कदम पर हमे सशक्त बनाए रख कर किसी भी प्रकार के निराशा से बचाती है
1- अपने हर दिन के समय का उचित विभाजन करना, जिसमें हमे ध्यान रखना है कि दिन की शुरुआत हम ऐसे काम से करें जो हमें दिन भर ऊर्जा दे सके, क्योंकि इसी ऊर्जा से हम दिन भर काम करने वाले है.
2- हमे अपने गुणों की पहचान कर उसे अपनी ताकत बनाना है, उस पर काम करके और निखारना है.
3- हमे कोई भी काम आरम्भ करते समय सिर्फ यह नहीं सोचना कि काम आरम्भ करने में क्या समस्याएं है अपितु केन्द्रित करना है कि हम इस काम से लोगों की कौन सी समस्या का हल दे सकते हैं, क्योंकि पहचान हमे इस बात से मिलनी है कि हम लोगो कि समस्या का हल दे पाने में कितना समर्थ है.
4- लोगों की समस्या पहचान कर उन्हें सुनिश्चित हल देने पर केन्द्रित होना है.
5- हमारा काम परिणाम पर केन्द्रित नहीं रहना है, बल्कि काम पर केन्द्रित रहना है. हमें हर समय ध्यान देना है कि हम अपना काम कितने अच्छे से कर सकते है, काम में अपना 100% प्रयास करना है, क्योंकि काम का अच्छे से पूर्ण होना स्वयम् सुखद परिणाम सुनिश्चित करता है.
6- किसी भी समय को खाली समय मान कर नष्ट नही करना है, बल्कि किसी न किसी रूप में किसी न किसी कार्य के हर समय का प्रयोग करना है.
7- हम एक से अधिक कार्य को समानांतर करके, एक प्रकार के कार्य से थकने पर दूसरे प्रकार के कार्य में लग सकते हैं.
8- इन सब के बीच हमे यह ध्यान देना है कि कोई भी कार्य दूसरे से अलग नहीं है अपितु सभी एक दूसरे के पूरक हैं. बस यह हमे निर्धारित करना है कि किस समय प्राथमिकता के आधार पर किस कार्य को कितना समय देना है.
9- यह भी ध्यान रखना है कि कार्य के परिणाम को एक निश्चित समय के बन्धन में इस प्रकार न बांधे कि कुछ विलम्ब हमे निराश कर दे. अच्छे से कार्य पूर्ण कर इसका परिणाम स्वयम् घटित होने देना है.
10- किए गए कार्य के अनुभव से हमे अगले कार्य को और अच्छे से करने का प्रयास करना है.
11- यह भी ध्यान रखना है कि यदि किसी कारण से किसी समय किसी कार्य का वह परिणाम नहीं आया जो अपेक्षित था, तो हमें निराश नहीं होना है अपितु पहले किए गए कार्य के अनुभव से नयी ऊर्जा के साथ आगे के कार्य के लिए प्रयास करना है. किसी समय पर प्राप्त असफलता चिर स्थाई नहीं है और न ही वह जीवन का अंत है. आगे लम्बा जीवन है जिसमें करने और पाने के लिए बहुत कुछ है. यह बात किसी भी उम्र के लिए सत्य है, क्योंकि मृत्यु तो किसी भी उम्र में आ सकती है, तो फिर हम कैसे निर्धारित करे कि कब बचा हुआ जीवन अधिक है और कब कम. और जो पुनर्जन्म पर विश्वास करते हैं वह मानते हैं कि आज का कर्म ही अगले जन्म में प्रारब्ध अर्थात भाग्य बनता है.
द्वारा- डाॅ कल्पना सिंह

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