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स्वरचित पंक्तियाँ अधिकार न मिटने दूंगी डाॅ कल्पना सिंह के साथ स्त्री शक्ति/ महिला सशक्तिकरण की व्याख्या

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                                 स्वरचित पंक्तियाँ अधिकार न मिटने दूंगी डाॅ कल्पना सिंह के साथ स्त्री शक्ति/ महिला सशक्तिकरण की व्याख्या क्या शक्ति मुझको सिखलाओगे सहन शक्ति क्या बतलाओगे स्त्री हूँ मैं मुझको क्या तुम त्याग तपस्या सिखलाओगे कोख से मैंने मेरी देखो यह विराट ब्रह्माण्ड रचा है नचिकेता, अभिमन्यु जैसे वीरों का संसार रचा है भांति भांति के पुष्पों से धरती का श्रृंगार किया है ज्ञान दीप से मैंने ही उज्ज्वल सारा संसार किया है स्नेह समर्पण वश मैंने न्योछावर सब कुछ कर डाला मेरी खुशियों पर जग ने फिर डाका ऐसा क्यों डाला क्षत्राणी हूँ जन्मजात मै छुपकर वार नहीं करती ललकारोगे मुझको तो मैं बिलकुल बरदाश्त नहीं करती हे सूर्य वंश के सूर्य (राम)  तुम्हारी शपथ उठाती हूँ मैं गर (अगर) निष्ठा से हर अपना धर्म निभाती हूँ मैं कैसी भी हो स्थिति मैं मान न लुटने दूंगी मानव होने का अपने मैं अधिकार न मिटने दूंगी क्षत्राणी हूँ जन्मजात मै छुपकर वार नहीं करती ललकारोगे मुझको तो मैं बिलकुल बरदाश्त नहीं करती कविता सुनने के ल...

आदर्श द्रव और बरनौली सिद्धांत/ बरनौली प्रमेय शैक्षणिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए भौतिक विज्ञान का यह टाॅपिक डाॅ कल्पना सिंह के साथ

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               आदर्श द्रव और बरनौली सिद्धांत/ बरनौली प्रमेय शैक्षणिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए भौतिक विज्ञान का यह टाॅपिक डाॅ कल्पना सिंह के साथ ऊर्जा संरक्षण नियम पर आधारित बरनौली सिद्धांत, जिसे स्विस भौतिक विज्ञानी डेनियल बरनौली ने दिया था, निम्नवत् है. आदर्श द्रव की धारा रेखीय प्रवाह मे, एकांक आयतन की दाब ऊर्जा, गतिज ऊर्जा एवम स्थितिज ऊर्जा का योग स्थिर रहता है. जिसे निम्न प्रकार से लिख सकते हैं. P 1 + 1/2 ρv 1 2 + ρgh 1 = P 2 +1/2 ρv 2 2 + ρgh 2 या P+ 1/2 ρv 2 + ρgh = नियतांक इसे इस प्रकार भी लिखते है किसी असम्पीड्य और अश्यान द्रव जो कि अपरिवर्ती और अघूर्णी प्रवाह में हो की धारा रेखा के प्रत्येक बिन्दु पर एकांक आयतन की दाब ऊर्जा, गतिज ऊर्जा एवम स्थितिज ऊर्जा का योग स्थिर रहता है. क्यों कि आदर्श द्रव वह है जिसमें निम्न गुण होते हैं 1- असम्पीड्य ( incompressible) - अर्थात प्रवाह के दौरान प्रत्येक बिंदु पर द्रव का घनत्व स्थिर रहता है. 2- अश्यान ( Non- viscous) - अर्थात द्रव की परतों के बीच कोई आंतरिक घर्षण बल नहीं होता है 3- अपरिवर्ती प्रवाह...

प्रत्यास्थता हुक का नियम शैक्षणिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए भौतिक विज्ञान का यह टाॅपिक डाॅ कल्पना सिंह के साथ

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                                     प्रत्यास्थता हुक का नियम शैक्षणिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए भौतिक विज्ञान का यह टाॅपिक डाॅ कल्पना सिंह के साथ प्रत्यास्थता - किसी वस्तु के पदार्थ का वह गुण, जिसके द्वारा वह वस्तु वाह्य विरूपक बल के हटाए जाने पर अपने प्रारम्भिक आकार और रूप को प्राप्त कर लेता है, प्रत्यास्थता कहलाता है. वाह्य बल लगाए जाने पर वस्तु के आकार अथवा रूप अथवा दोनों में होने वाला यह परिवर्तन, प्रत्यास्थता विरूपण कहलाता है. प्रत्यास्थता की दृष्टि से पदार्थ का विभाजन - 1- पूर्ण प्रत्यास्थ पदार्थ - जो वस्तुएँ विरूपक बल हटा लेने पर पूर्णत: अपनी पूर्व अवस्था में लौट आती है, पूर्ण प्रत्यास्थ कहलाती है. व्यवहार में कोई भी पदार्थ पूर्ण प्रत्यास्थ नहीं होता किन्तु क्वार्ट्ज को पूर्ण प्रत्यास्थ का उदाहरण मान लेते हैं. 2- पूर्ण सुघट्य पदार्थ - जो वस्तुएँ विरूपक बल हटा लेने पर भी अपनी पूर्व अवस्था को प्राप्त नहीं करती, बल्कि सदैव के लिए विरूपित हो जाती है, पूर्ण सुघट्य कहलाती है. व्यवहार में क...