शाम्भवी मुद्रा- शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए
शाम्भवी मुद्रा- शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए
शाम्भवी मुद्रा - चमत्कारिक रूप से मस्तिष्क क्षमता एवं मेमोरी बढ़ाने के लिए
शाम्भवी मुद्रा को शिव मुद्रा या भैरवी मुद्रा भी कहते हैं, यह एक ऐसी मुद्रा है जिसके माध्यम से चमत्कारिक शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक सामर्थ्य प्राप्त किया जा सकता है.
शाम्भवी मुद्रा करने का तरीका -
सुख आसन, पद्मासन या जो भी स्थिति आप के लिए सहज हो, उसमें बैठे.
रीढ़ की हड्डी को सीधा करे.
कंधे खिचे हुए किन्तु सहज रहे.
दोनों हाथों में तर्जनी को अंगूठे से मिलाकर गोला बनाए, अर्थात ज्ञान मुद्रा की स्थिति.
अन्य तीनों उंगलियाँ सीधी एवं सटी हुयी रहे.
इस अवस्था में हथेली ऊपर की तरफ किए हुए घुटनों पर टिका ले.
अब चेहरा कुछ नीचे झुकाएँ.
दोनों आंखों से भौहों के मध्य अर्थात आज्ञा चक्र में देखने का प्रयास करे.
अब चेहरे को धीरे धीरे थोड़ा ऊपर की ओर उठाएं, ध्यान रखें कि आंखों का फोकस आज्ञा चक्र पर बना रहे.
जब इतने अभ्यास में पारंगत हो जाए तब शाम्भवी मुद्रा करते समय आंखों को धीरे धीरे बन्द करने का अभ्यास करें
बन्द आंखों से की गई यह मुद्रा अंतरतम शाम्भवी कहलाती है.
अंतरतम शाम्भवी की स्थिति में आंखों पर अनावश्यक दबाव नहीं देना चाहिए.
शाम्भवी की स्थिति में हमे ध्यान का अतिरिक्त प्रयास नहीं करना है, मात्र भौहों के बीच फोकस करते हुए अपनी श्वास पर ध्यान देना है.
शाम्भवी मुद्रा के लाभ-
शाम्भवी मुद्रा के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक तीनों प्रकार के लाभ होते हैं.
शारीरिक लाभ
शाम्भवी का नियमित अभ्यास आंखों की पेशियों को मजबूत करता है और आंखों के तनाव से मुक्ति देता है.
शाम्भवी मुद्रा आंखों की मृत कोशिकाओं को पुनर्जीवित करने की सामर्थ्य रखता है.
शाम्भवी मुद्रा रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाता है.
शाम्भवी मुद्रा अनिद्रा और तनाव से मुक्त करता है.
इसका नियमित अभ्यास मधुमेह, सिर दर्द, मोटापा, थायरॉयड आदि से मुक्ति देता है.
मानसिक लाभ
दिल और दिमाग को शान्त कर शाम्भवी मुद्रा मानसिक क्षमता बढ़ाती है.
शाम्भवी मुद्रा से मस्तिष्क के न्यूरॉन बढ़ते हैं, जिस कारण मस्तिष्क की शक्ति बढ़ जाती है.
स्मरण शक्ति में तीव्र सकारात्मक परिवर्तन होता है.
मानसिक एकाग्रता बढ़ती है.
भावनात्मक संतुलन स्थापित करता है.
आध्यात्मिक लाभ
शाम्भवी मुद्रा, आज्ञा चक्र के शीघ्र जागरण में सहायक है.
आज्ञा चक्र जागरण से मनुष्य के भीतर की शक्तियों का जागरण होता है, और व्यक्ति सिद्धि प्राप्त करता है.
शाम्भवी मुद्रा करने में सावधानियां
शाम्भवी जैसी शक्तिशाली मुद्रा को गलत तरीके से करने पर हानि हो सकती है.
इस मुद्रा को करते समय आंखों पर अतिरिक्त दबाव नहीं देना चाहिए.
जब तक सहज अनुभव हो तभी तक शाम्भवी का अभ्यास करना चाहिए.
ग्लूकोमा, डायबिटीज रेटिनोपैथी या आंख से सम्बन्धित कोई अन्य समस्या होने पर भी शाम्भवी का अभ्यास नहीं करना चाहिए.
किसी योग्य प्रशिक्षक के देख रेख में ही शाम्भवी का अभ्यास करना चाहिए.
शाम्भवी मुद्रा चमत्कार या विज्ञान
जो ज्ञान के मूल को समझता है उसके लिए प्रकृति की हर घटना विज्ञान है और न समझने वाले के लिए यह चमत्कार है.
ठीक इसी प्रकार शाम्भवी भी है.
हम सभी के भीतर सृष्टि का स्रोत, सृष्टा कार्य करता है, इसी के प्रभाव से हमारे अन्दर निरंतर परिवर्तन होते हैं, हम शिशु से बालक, युवा, प्रौढ़ होते जाते हैं.
शाम्भवी मुद्रा इस आन्तरिक शक्ति को काम करने का मार्ग देती है, जिससे चमत्कार जैसे प्रभाव देखने को मिलते हैं. जिससे हमारे हृदय, लीवर, किडनी आदि सभी में सुधार सम्भव होता है.
हमारा शरीर पंच कोशों से निर्मित है,
अन्नमय कोश, प्राणमय कोश, मनोमय कोश, विज्ञानमय कोश, आनन्दमय कोश
आनन्दमय कोश , आन्तरिक कोश है. जिसकी अभिव्यक्ति होने पर परम आन्नद का अनुभव होता है.
शाम्भवी मुद्रा हमारे भौतिक शरीर, मानसिक शरीर, ऊर्जा शरीर और आकाशीय शरीर को एक सीध में लाकर आन्तरिक आनन्दमय कोश की अभिव्यक्ति को आसान करता है.
शाम्भवी मुद्रा के अभ्यास से हम वह शक्ति प्राप्त करते हैं जिससे बड़े बड़े काम आसानी से हो सके.
जिस प्रकार एक मजबूत मशीन बिना चिकनाई (ल्यूब्रिकेंट) के काम नहीं कर सकती, हमारा शरीर शक्तिशाली होते हुए भी सहजता से कार्य तब ही करता है जब उस पर कृपा भी हो, कृपा हमारे लिए चिकनाई का काम करती है. शाम्भवी मुद्रा हमारे लिए वह खिड़की खोलती है जिससे हमे कृपा की प्राप्ति होती है और कार्य सहज हो जाते हैं.
लेखिका डाॅ कल्पना सिंह
सहजता के लिए यूट्यूब वीडियो देखें



Very good
जवाब देंहटाएंKnowledge fully post
जवाब देंहटाएंSpritual post
जवाब देंहटाएं