सेमिनार एक प्रेरक कहानी- डाॅ कल्पना सिंह द्वारा

                                       सेमिनार

एक प्रेरक कहानी

सीन 1 - उठ जा रिया, माँ ने आवाज लगाई. रिया ने नींद में ही अलसाई आवाज में उत्तर दिया, बस माँ थोड़ी देर. तभी माँ ने कहा, आज तो स्कूल में नेचर (प्रकृति) पर सेमिनार है रिया तू लेट (देर) हो जाएगी. चद्दर खींचते हुए माँ ने कहा'चल उठ'

सेमिनार सुनते ही रिया झट से उठ बैठी, और क्यों न हो, वह एक लम्बे समय से इस सेमिनार की प्रतीक्षा कर रही थी. उसे टीचर ( शिक्षिका) ने बताया था कि इस सेमिनार में वह अपने नेचर (प्रकृति ) के बारे में जानेगी.

रिया 7 स्टैंडर्ड ( 7 कक्षा) में पढ़ने वाली 12 साल की बच्ची है. वह जल्दी ही स्कूल के लिए तैयार हो गई. 

रिया ने आवाज लगाई, मम्मा मै जा रही हूँ, माँ पीछे से टिफिन लेकर दौड़ी, अरे रुक टिफिन तो लेले, कहते हुए माँ ने टिफिन रिया के बैग में डाल दिया.

सीन 2- क्या बात है रिया, जब से आई है स्कूल से ऐसे चुप चाप बैठी है, किसी ने कुछ कहा क्या? माँ ने पूछा.

नहीं मम्मा किसी ने कुछ नहीं कहा, रिया ने उत्तर दिया.

तो फिर चल चियर अप तुम्हे पार्क ले चलते है, माँ ने कहा.

नहीं मम्मा आज नहीं जाना, मेरा मन नहीं है, रिया ने कहा.

क्या बात है बेटा मुझे बताओ तो, स्कूल से आकर कुछ खाया भी नहीं, खेलने भी नहीं जा रही हो, तुम्हारी तबीयत तो ठीक है, माँ ने कहा.

ठीक है माँ कहते हुए रिया कमरे की तरफ चली गई. 

माँ की चिंता अब बढ़ने लगी, तरह तरह की बातें दिमाग में घूमने लगी, जमाना बहुत खराब है, पता नहीं क्या हुआ होगा, माँ भी रिया के पीछे गई, स्वयं धैर्य रख, रिया को समझाने और पूछने लगी.

तभी दरवाजे की घंटी बजी, रिया के पापा घर आ गए. घबराई हुई माँ ने सब बातें बताई.

माता पिता दोनों रिया को समझाने और पूछने लगे.

रिया ने कुछ नहीं कहा.

पापा ने कहा, कोई बात नहीं है तो अब मुझे कुछ नहीं सुनना, चलो सब साथ में खाना खाएंगे.

नहीं पापा मुझे कोई बात नहीं करनी अभी, न ही मै कुछ खाऊंगी.

अब माता पिता की चिंता बढ़ रही थी. उन्होंने रिया की फ्रैंड्स से फोन कर पूछा,टीचर को फोन कर बात की, टीचर ने प्रधानाचार्या को बताया.

परन्तु कुछ पता नहीं चला.

कुछ देर में टीचर्स, प्रिंसिपल, साथ पढ़ने वाले बहुत से बच्चे रिया के घर आ गए. 

सभी के मन किसी अनहोनी से आशंकित थे. सभी जानना चाहते थे कि क्या हुआ है.


पापा ने फिर पूछा बोलो रिया क्या बात है, देखो सब परेशान है, तुम अच्छी बच्ची हो, चलो कुछ खा लो.

पापा मै नहीं खा सकती, कहते हुए रिया रो पड़ी. आज खालूंगी पापा पर कल क्या होगा, कल सभी लोग क्या खाएंगे, हमें यह अधिकार प्रकृति ने नहीं दिया कि हम दूसरो का अधिकार खा जाए, आज सेमिनार में मैंने देखा कि सभी लोग धरती को बंजर कर रहे हैं, मिट्टी को नष्ट कर रहे हैं, पेड़ काट रहे हैं, हवा को दूषित कर रहे हैं, कोई नहीं रुक रहा, कोई नहीं सुन रहा, इन्हें बचाने कोई नहीं आगे आ रहा. आप भी नहीं सुनेगे, आपभी नहीं आगे आएगें बस रोज सेमिनार होगे और फिर सब लग जाएगे, प्रकृति का शोषण करने में, कुछ नहीं बचेगा कल के लिए, फिर क्यों न मै आज से ही छोड़ दू, कम से कम मैं भविष्य की अपराधी नहीं बनूगी, भविष्य मुझसे नहीं कहेगा कि मैंने उसका अधिकार छीन लिया.

इस घटना ने वहाँ उपस्थित सब लोगों को झकझोर दिया था.

सब ने प्रतिज्ञा की, आज से अभी से, Save Soil, Save water, Save tree, Save Nature, Save food. ( मिट्टी बचाव, पानी बचाव, पेड़ बचाव, प्रकृति बचाव, भोजन बचाव) 

लेखिका- डाॅ कल्पना सिंह


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