तनाव एवं अवसाद
डाॅ कल्पना सिंह
तनाव एवं अवसाद
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत की 5 करोड़ से अधिक आबादी अवसाद ग्रस्त हैं। तनाव एवं अवसाद एक ऐसी समस्या, जिससे ग्रस्त व्यक्ति जीवित रहते हुए भी, जीवन से बहुत दूर हो जाता है। विडम्बना यह कि , पीड़ित व्यक्ति की समस्या को समझने वाले लोग भी बहुत कम है। कोई प्रयास करे या नहीं, किन्तु यह जीवन हमारा अपना है, इसे राष्ट्र की सम्पत्ति बनाने का दायित्व भी हमारा है तथा जीवन के सुख का अधिकार भी हमारा है। इसके लिए आवश्यक है कि आज इस गम्भीर समस्या के कारण, लक्षण एवं निवारण को पूर्ण रूप से समझा जाए। इस समस्या के संदर्भ में सभी का जागरूक होना अनिवार्य हो गया है।यह जागरूकता हमें इन विषम परिस्थितियों से बचाती है, और यदि इन समस्याओं में पड़ ही गये, तो बाहर निकाल लाती है।
तनाव एवं अवसाद अलग-अलग हैं। तनाव शारीरिक, भावनात्मक एवं व्यवहार सम्बन्धी लक्षणों के माध्यम से दिखता है, तो अवसाद में मानसिक लक्षण मुख्य होता है, किन्तु अवसाद में शारीरिक, भावनात्मक एवं व्यवहार सम्बन्धी लक्षण भी दिखाई देते हैं। कई बार लम्बे समय तक रहने वाला तनाव भी अवसाद का कारण बनता है।
अवसाद के मुख्य कारण-
जीवन में अचानक आया कोई बड़ा तथा नकारात्मक परिवर्तन जैसे अपने किसी प्रियजन को खो देना।
मस्तिष्क में स्ट्रेस हार्मोन की अधिकता हो जाने से
हार्मोन में अचानक बदलाव होने से जैसे रजोनिवृत्ति के समय या प्रसव पश्चात या थायराॅइड की समस्या होने पर
अनुवांशिक कारणों से
मौसम के प्रभाव से
किसी बीमारी या औषधि के प्रभाव से
मुख्य लक्षण जो अवसाद ग्रस्त व्यक्ति में देखें जाते हैं -
दिन भर या सुबह के समय उदासी
थकावट, कमजोरी एवं सिर दर्द
स्वयं को अयोग्य एवं दोषी मानना
आत्मविश्वास की कमी होना
स्वयं को हारा हुआ मानना
ध्यान केन्द्रित करने में कठिनाई
निर्णय लेने में असमर्थता
बेचैनी एवं चिड़चिड़ापन
आलस्य बना रहना तथा नींद की समस्या जैसे बहुत अधिक या बहुत कम होना
सभी क्रिया कलापों में नीरसता एवं अकारण भयभीत रहना
बार बार आत्महत्या का विचार आना
बहुत अधिक या बहुत कम खाना
उच्च रक्तचाप की समस्या
उपरोक्त में से 5 या अधिक लक्षण 2 सप्ताह या उससे अधिक समय तक रहने पर , DSM -5 परीक्षण तकनीक के आधार पर यह अनुमान लगा सकते है कि व्यक्ति अवसाद ग्रस्त हैं।
उपरोक्त लक्षणों के अतिरिक्त अत्यधिक तनाव की स्थिति में कुछ शारीरिक लक्षण जैसे हाथ पैर कांपना, बार बार प्यास लगना, चक्कर आना, घबराहट आदि भी अनुभव किए जाते हैं।
कुछ सामान्य उपाय जो अवसाद ग्रस्त व्यक्ति को समस्या से बाहर लाने में मददगार पाए जाते हैं-
यथा संभव सकारात्मक रहने का प्रयास करे
सकारात्मक रहने के लिए यदि आवश्यकता हो तो किसी काउन्सलर की सहायता ली जा सकती है
आवश्यकतानुसार किसी मनोचिकित्सक की सलाह भी ली जा सकती है
पीड़ित व्यक्ति को अकेले नहीं रहना चाहिए, दोस्तों के साथ सुखद वातावरण में रहे
सुबह-शाम व्यायाम करें एवं टहलने जाएं
काम में व्यस्त रहे
दिल ही दिल में घुटने के बजाय किसी विश्वासपात्र या काउन्सलर से बात करें
मन दुखी होने पर भी ऐसा अभिनय करने का प्रयास करे कि आप प्रसन्न है
विशेष प्रभावकारी तथ्य जिन्हें अपनाकर पीड़ित व्यक्ति विषम से विषम परिस्थितियों से भी बाहर आकर एक सफल एवं सुखद जीवन जी सकता है-
हल्का एवं सुपाच्य, पोषक तत्व से भरपूर भोजन ही लें, दही एवं खट्टी चीजों से दूर रहें, मैदे का प्रयोग कदापि न करें, नमक एवं चीनी बंद कर दें या कम से कम कर दें।
मस्तिष्क को बल देने वाली औषधि जैसे ब्राह्मी शंखपुष्पी आदि का प्रयोग करें।
शिरोधारा, शिरोअभ्यंग, नस्य अत्यधिक लाभकारी है, इनका लाभ ले।
व्यायाम, योग, ध्यान को जीवन का अनिवार्य अंग बनाएं, मुख्य रूप से बालासन, भुजंगासन, कपालभाति, भ्रामरी, भस्त्रिका, अनुलोम-विलोम करें, हो सके तो सूर्य-नमस्कार को अपनाएं।
धूम्र चिकित्सा का प्रयोग कर समस्या से तीव्रता से छुटकारा पा सकते हैं, इसके लिए घी एवं गाय के गोबर के कंडे को जला कर उसमें वह औषधीय जड़ी बूटी जलाते हैं जो मस्तिष्क को बल देते हैं, इस धूम्र का नासिका से सेवन लाभकारी होता है।
औषधीय जड़ी बूटी को उबालकर उस जल की बस्ती तीव्र गति से लाभ पहुंचाती है
जलनेति भी लाभकारी है
इनके साथ अपने मन को सकारात्मक एवं प्रसन्न रखने के लिए उसी प्रकार इसका ध्यान रखें जैसे एक माता सभी कार्य करते हुए भी अपने बच्चे का ध्यान रखती है।
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