चुनावी रैली
चुनावी रैली
हम सभी अवगत है इस तथ्य से कि चुनावी रैली, हमारे देश में कोई नयी बात नहीं, बल्कि विभिन्न देशों में चुनावी रैली का चलन है
आज आॅफिस से निकले ही थे, कुछ देर तक काम किया था यह सोच कर कि हमारे ही देश का काम है, देश की तरक्की के लिए मेहनत कर रहे हैं, किन्तु घर भी समय पर पहुचना अनिवार्य है
घर में बच्चों बूढों की व्यवस्था देखना आवश्यक है, यह स्वस्थ समाज का निर्माण करता है
जी हाँ, जानती हूँ, अच्छा व्यवस्थापक बनना है और सभी प्रकार की व्यवस्था चाक चौबंद करनी है, इसीलिए घर पर अच्छे सहायक (हेल्पर) रखे है, किन्तु कुछ भावनात्मक जरूरतें, कुछ संस्कार निर्माण कार्य तो हम ही पूर्ण कर सकते हैं, सहायक नहीं
यदि यह कार्य न भी करना हो तो भी अपना स्वास्थ्य, अपना दैनिक कार्य, उचित विश्राम, यह तो आवश्यक ही है
इसके अभाव में बीमारियां सिर उठाएगी, निरंतर घटती ऊर्जा से कार्य कर पाना कैसे संभव होगा
किन्तु क्या कर सकती हूँ? पूरा समय व्यवस्था (time management) अच्छे से किया था, किन्तु चुनावी रैली ने सब ध्वस्त कर दिया
चारों ओर लोगों का जमावड़ा था, सडकें गाडियों से पटी पडी़ थी
आधे घंटे का रास्ता लगभग ढाई घंटे में तय हुआ, दो घंटे की हानि सहन करना पड़ा
हानि किसकी ? क्या मेरी?
नहीं भाई, मुझसे ज्यादा मेरे देश की, जिसके लिए मैने अपना बहुमूल्य आधा घण्टा देकर अतिरिक्त कार्य किया था, उसी देश का दो घंटा खो गया, मैंने अपने जीवन का दो घंटा खो दिया, यदि किसी का जीवन छीनने का अधिकार किसी को नहीं है तो अकारण के जमावड़े से मेरे जीवन को दो घंटे छोटा करने का अधिकार किसी को भी क्यों?
अरे जनाब दो घंटे ही क्यों? सड़क पर हजारों लोगों मे से प्रत्येक ने दो घंटे खोए थे, तो देश ने तो हजारों घंटे खो दिए
रैली यदि जागरूकता लाने के लिए होती, कम भीड़ से देश को अधिक लाभ होता, तब तो रैली अच्छी होती, तर इस चुनावी रैली ने तो देश को कई दिन पीछे धकेल दिया
पूरी सड़क कूड़े से पट गई थी, अरे रैली में भोजन सामग्री का वितरण हुआ था, प्लास्टिक के पैकेट में, उस प्लास्टिक से हमारी शस्यश्यामला धरा को पाट दिया गया था
क्या लाभ ऐसी रैली का ?
और एक बड़ी बात, कोविड के बाद तो अपनी बात रखने और लोगों तक पहुचाने के असंख्य आनलाइन माध्यम बच्चों को भी पता है, तो क्या सच में इन चुनावी रैलियों का कोई विकल्प नहीं है
इस प्रकार की रैली में भीड़ क्या सच में पार्टी के वैचारिक समर्थकों की होती है, क्या वे विचार वान बुद्धिजीवी है, क्या उन्हें समय की महत्ता का ज्ञान है ?
क्या यह चुनावी रैली विचारशील बुद्धिजीवी लोगो के समाज को तमाचा नही है?
क्या भीड़ जुटाने से बुद्धजीवियों का विचार बदलता है
हम भारतीय कई विकसित देशों की अर्थव्यवस्था के आधार स्तम्भ हैं
इसी बुद्धि को घंटो सड़कों पर व्यर्थ होने को मजबूर करती है एसी भीड़ व्यवस्था
विचार अवश्य कीजिएगा
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जय हिंद
डाॅ कल्पना सिंह
Bechari 3 hour jam me rahi hai. Wahi dard hai. Good writing
जवाब देंहटाएंNice
जवाब देंहटाएंGajab
जवाब देंहटाएंBahut badia
जवाब देंहटाएंGreat
जवाब देंहटाएंAwesome
जवाब देंहटाएंBahut achhee lines h
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