पेपर लीक कांड सामाजिक अनैतिकता

 डाॅ कल्पना सिंह


पेपर लीक कांड

सामाजिक अनैतिकता

हम और आप बार बार सामाजिक स्वास्थ्य की बात करते हैं, किन्तु प्रति दिन समाज में घटती घटनाये मनुष्यता को मुह चिढाती है॥ 

प्रगति का अर्थ धन एकत्र कर लेना, बंगला बना लेना आदि भौतिक संसाधन मात्र रह गए है॥ 

तभी तो घटती हैं ऐसी झकझोर देने वाली घटनाएं॥ 

परीक्षा के पूर्व, सख्ती के बावजूद, पेपर आउट हो जाता है, UPTET का पेपर हाल ही में आउट हो गया॥ 

कुछ लोग कह सकते हैं कि हां यह एक बुरी घटना है किन्तु जघन्य अपराध नही॥ 

क्योंकि किसी के प्राण नहीं गए इसमें, यह आर्थिक अपराध है, धोखाधड़ी है॥ 

पर जरा ठहरिए  ॒ यह एक ऐसा अपराध है जो भविष्य में शिक्षा की बुनियाद हिला सकता था॥ शिक्षा को तो समझते ही है, शिक्षा अर्थात हमारा भविष्य॥ आज की शिक्षा ही भविष्य के भारत का निर्माण करेगी॥ 

बबूल के बीज बो कर आम के सपने नही देख सकते॥ 

शिक्षा की बुनियाद पर प्रहार, भविष्य के भारत के विरुद्ध अपराध है, राष्ट्र द्रोह है॥ 

इस अपराध का वर्तमान पहलू भी है॥ 

टीईटी की परीक्षा देने आए असंख्य परीक्षार्थी किन किन स्थितियों का सामना करके तैयारी की और गन्तव्य तक पहुचे, अचानक परीक्षा रद्द होती है, यह उन संघर्षरत परीक्षार्थियों पर क्या प्रभाव डालेगा, आप समझ सकते हैं॥ 

हां प्रशासन ने, सरकार ने परीक्षार्थियों की समस्या कम करने का प्रयास अवश्य किया, उन्हें आने जाने का मुफ़्त साधन उपलब्ध कराया गया, आगे पुनः परीक्षा का कोई खर्च इनसे नहीं लिया जाएगा॥ 

लेकिन ज़नाब गरीबी के दंश में जीवन का एक एक दिन भारी पड़ता है, यह बात उन अपराधियों को कैसे समझ में आ सकती है, उन्हें तो इसी प्रकार दूसरों की सम्पत्ति में डकैती डालने की आदत है, किन्तु उन्हें इस बात का ज्ञान तो क्या भान भी नहीं है, कि विचारों की ऊर्जा में बड़ी सामर्थ्य होती है, और असंख्य परीक्षार्थियों के अंदर से निकली यह ऊर्जा उन अपराधियों का सफाया कर देगी॥ 

सरकार द्वारा उठाए गए तात्कालिक कदम से परीक्षार्थियों को कुछ राहत तो मिली किन्तु यह तो एक परिवार में एक बच्चे का संसाधन दूसरे के लिए प्रयोग करने जैसा है, देश का तो नुकसान ही हुआ, प्रत्येक व्यक्ति ने जितना धन खर्च किया, वह देश का ही था॥ आज भले ही सरकार ने कहा कि दोबारा परीक्षा के लिए कोई धन नहीं लिया जाएगा, अर्थात अब सरकार वह खर्च उठाएगी॥ परन्तु सरकार अर्थात आयकर दाता का ही तो धन होगा॥ वह टैक्स जो हम और आप राष्ट्र निर्माण/ राष्ट्र प्रगति के लिए देते हैं॥ 

नुकसान हमारा ही हुआ, हमारे देश का हुआ॥ 

तो क्या अपराधी देश द्रोही नहीं हुआ? 

क्या नैतिकता, हमारे पूर्वजों की भांति, पुनः हमारे रक्त का गुण नहीं बन सकती, जिससे इस प्रकार के अपराध हो ही नहीं॥ 

अपराध का एक ही मुख्य कारण, "नैतिकता का पतन"

हे भारत की मांओं जागो

भारत माँ पुकार रही

फिर से अभिमन्यु पैदा कर दो

तुझसे है अब आस यही

जिस देश ने सांसों से पहले

नैतिकता रोपित किया सदा

क्यों अपराधी है आज बढ़ रहे

खर पतवारों सदृश वहां॥ 


गर्भ से ही नैतिकता की शिक्षा स्थिति बदल सकती है॥ 

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