परिवेश एक प्रेरक कहानी डाॅ कल्पना सिंह द्वारा
परिवेश एक प्रेरक कहानी एक मध्यम वर्गीय परिवार में आज बच्चे के जन्म का अवसर है, सभी आशान्वित है सुखद सौभाग्य के लिए. जुड़वां बच्चों का जन्म होता है. सभी की खुशी दोगुनी हो गई. किन्तु बच्चों की माँ तारा अचानक जैसे आसमान से जमीन पर गिर पड़ीं हो, उन्हें पता चलता है कि जिन बच्चों को पुरुष प्रकृति की संतानें समझा गया था, डाक्टर को आशंका है कि वे पूर्णतया पुरुष नहीं है, अर्थात उनके किन्नर होने की आशंका. जिस समय तारा को यह बात पता चली, घर का कोई व्यक्ति वहाँ नहीं था. बच्चों के पिता सुदर्शन भी कुछ आवश्यक सामग्री लाने के लिए गए थे. तारा ने विनती किया कि यह बात उसके परिवार में अब किसी को न बताई जाए. क्योंकि परिवार और विशेष रुप से सुदर्शन को पुत्र की चाहत थी, और फिर किन्नर संतान को वह कभी भी स्वीकार नहीं करेंगे. तारा अपने प्रयासों से यह बात छिपाने में सफल रही. एक माँ के लिए तो अपनी संतान है वह, भले ही किन्नर ही क्यों न हो. बच्चे बड़े हो रहे थे, उनके व्यवहार दिखाई देने लगे थे. जिन्हें तारा मजाक में टालने का प्रय...