संदेश

जुलाई, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

परिवेश एक प्रेरक कहानी डाॅ कल्पना सिंह द्वारा

चित्र
                        परिवेश एक प्रेरक कहानी एक मध्यम वर्गीय परिवार में आज बच्चे के जन्म का अवसर है, सभी आशान्वित है सुखद सौभाग्य के लिए. जुड़वां बच्चों का जन्म होता है. सभी की खुशी दोगुनी हो गई.  किन्तु बच्चों की माँ तारा अचानक जैसे आसमान से जमीन पर गिर पड़ीं हो, उन्हें पता चलता है कि जिन बच्चों को पुरुष प्रकृति की संतानें समझा गया था, डाक्टर को आशंका है कि वे पूर्णतया पुरुष नहीं है, अर्थात उनके किन्नर होने की आशंका. जिस समय तारा को यह बात पता चली, घर का कोई व्यक्ति वहाँ नहीं था. बच्चों के पिता सुदर्शन भी कुछ आवश्यक सामग्री लाने के लिए गए थे. तारा ने विनती किया कि यह बात उसके परिवार में अब किसी को न बताई जाए. क्योंकि परिवार और विशेष रुप से सुदर्शन को पुत्र की चाहत थी, और फिर किन्नर संतान को वह कभी भी स्वीकार नहीं करेंगे. तारा अपने प्रयासों से यह बात छिपाने में सफल रही. एक माँ के लिए तो अपनी संतान है वह, भले ही किन्नर ही क्यों न हो. बच्चे बड़े हो रहे थे, उनके व्यवहार दिखाई देने लगे थे. जिन्हें तारा मजाक में टालने का प्रय...

सेमिनार एक प्रेरक कहानी- डाॅ कल्पना सिंह द्वारा

चित्र
                                         सेमिनार एक प्रेरक कहानी सीन 1 - उठ जा रिया, माँ ने आवाज लगाई. रिया ने नींद में ही अलसाई आवाज में उत्तर दिया, बस माँ थोड़ी देर. तभी माँ ने कहा, आज तो स्कूल में नेचर (प्रकृति) पर सेमिनार है रिया तू लेट (देर) हो जाएगी. चद्दर खींचते हुए माँ ने कहा'चल उठ' सेमिनार सुनते ही रिया झट से उठ बैठी, और क्यों न हो, वह एक लम्बे समय से इस सेमिनार की प्रतीक्षा कर रही थी. उसे टीचर ( शिक्षिका) ने बताया था कि इस सेमिनार में वह अपने नेचर (प्रकृति ) के बारे में जानेगी. रिया 7 स्टैंडर्ड ( 7 कक्षा) में पढ़ने वाली 12 साल की बच्ची है. वह जल्दी ही स्कूल के लिए तैयार हो गई.  रिया ने आवाज लगाई, मम्मा मै जा रही हूँ, माँ पीछे से टिफिन लेकर दौड़ी, अरे रुक टिफिन तो लेले, कहते हुए माँ ने टिफिन रिया के बैग में डाल दिया. सीन 2- क्या बात है रिया, जब से आई है स्कूल से ऐसे चुप चाप बैठी है, किसी ने कुछ कहा क्या? माँ ने पूछा. नहीं मम्मा किसी ने कुछ नहीं कहा, रिया ने उत्तर दिया. ...

प्रेरणा

चित्र
  प्रेरणा सत्य घटनाओं पर आधारित एक प्रेरक कहानी जुलाई का महीना है, तेज बरसात हो रही है, गर्मी में भी ठण्डी का आभास हो रहा है, रामशरण के घर की छत से उसकी गरीबी पानी के रूप में टप टप टपक रही है, इन सब के बीच रामशरण के जीवन में एक नई आस जन्म ले रही है, रामशरण की पत्नी उर्मिला गर्भवती है और सन्तान बस जन्म लेने ही वाली है,  रामशरण की प्रतीक्षा में खुशी और घबराहट दोनों रह रह कर दिखाई दे रहे है, कभी यह सोच कर वह खुश हो रहा है कि एक बेटे का जन्म होगा जो कुछ ही समय में उसका सहारा बन कर सौभाग्य का सूर्य उदित करेगा, तो कभी घबराता कि कहीं बेटी हुई तो इस गरीबी में जहाँ रोटी जुटाना कठिन है, बेटी का बोझ कैसे उठाएगा, प्रतीक्षा की घड़ियाँ सदियों सी लग रही है, तभी प्रतीक्षा समाप्त होती है, भीतर से एक स्त्री ने आकर सूचना दी, रामशरण के ऊपर पहाड़ टूट पडा़, वह बुत सा खड़ा रह गया, पर वास्तव मे जितना उसने सोचा था, स्थिति उससे कहीं अधिक भयावह लग रही थी, सूचना उसके कानो में गूंज रही थी, ' बिटिया भयी है लेकिन एक समस्या है, ओके एक ही पांव है'  रामशरण और उर्मिला के आंसू नहीं रुक रहे थे, रह रह कर दोनो...