तस्वीर स्वरचित पंक्तियाँ डाॅ कल्पना सिंह के द्वारा, #photo, # memory
तस्वीर स्वरचित पंक्तियाँ डाॅ कल्पना सिंह के द्वारा तकदीर थे कभी जो तस्वीर हो गए यादों के गुलिस्ताँ के वो फूल हो गए उंगली पकड़ के जिनकी नटखट कदम चले जाने कहाँ सितारों के बीच खो गए यह कालचक्र चलकर रुकता नहीं कभी पीछे जो छोड़ आए मिलता नहीं कभी तस्वीर में सिमट जो जीवन चला गया मुड़कर हमारे हाथ फिर लगता नहीं कभी यादों के गली में जब यह आंख नम हुई तस्वीर में सिमटती हर शाम जब हुई यादों के बवंडर थे दिल में छुपे हुए जीवन की मेरे शायद थी शाम तब हुई देखना कभी एक तस्वीर ध्यान से क्या क्या हमें सिखाती यह मौन ज्ञान से यादों के समंदर में डुबकी लगाती है जीवन का रस पिलाती फिर लाड़ प्यार से रचनाकार डाॅ कल्पना सिंह कविता सुनने के लिए क्लिक करें